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आज भी धर्मनगरी गुनगुनाती शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब...

Sat, 21 Jul 2018 07:52 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 21 Jul 2018 07:52 PM IST
सार

- नीरज निशा कार्यक्रम प्रख्यात कवि नीरज ने सुनाई थी कविताएं 
-  शहर में 1986 में हुआ था कार्यक्रम 
- आज भी उनकी कविताओं को गुनगुनाते कवि 
 

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Chitrakoot has a deep relation of Gopal das Neeraj
फाइल फोटो जिसमें कवि नीरज कविता सुनाते हुए 

विस्तार

पद्म भूषण विख्यात कवि गोपाल दास नीरज का धर्मनगरी चित्रकूट से भी गहरा नाता था। वह जिले के कवि सम्मेलनों में भी भाग लिया करते थे। उन्होंने भारतीय साहित्य संस्थान द्वारा 1986 में आयोजित शहर- नीरज निशा कार्यक्रम में अपनी लिखी कविताओं से जिले वासियों का दिल जीत लिया था। आज भी उनकी पढ़ी गई कविताओं को यहां के कवि गुनगुनाते हैं।
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Chitrakoot has a deep relation of Gopal das Neeraj
गोपाल दास नीरज
शहर के नए धर्मशाला में भारतीय साहित्य संस्थान ने 1986 में कवि सम्मेलन का आयोजन किया था। जिसका नाम विख्यात नीरज के नाम पर ‘नीरज निशा’ रखा गया था। जिसमें उन्होंने रागिनी है एक प्यार की जिंदगी है जिसका नाम। शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब उसमें फिर मिलायी जाए, थोड़ी सी शराब...। क्या शबाब था कि फूल- फूल प्यार कर उठा क्या, देख आइना मचल उठा क्या सुरूप था।
 
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गोपाल दास नीरज
यह कार्यक्रम भारतीय साहित्य संस्थान के प्रमुख कवि स्व. देशराज पांडेय व तत्कालीन एडीएम रोहित नंदन के नेतृत्व में किया गया था। जिसमें विशिष्ट अतिथि जज प्रेम शंकर गुप्ता थे। कार्यक्रम का संचालन उमाकांत मालवीय ने किया था। इस कार्यक्रम में स्थानीय कवियों ने भी अपनी कविताएं सुनाईं थीं। 
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