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कोरोना एंटीबॉडीज के साथ पैदा हो रहे बच्चे, बिगड़ रही तबीयत, सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव बच्चों के दिल पर
Sat, 29 May 2021 07:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 29 May 2021 07:35 PM IST
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नवजात शिशु
- फोटो : social media
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गर्भावस्था में कोरोना संक्रमित होने वाली महिलाओं के बच्चे एंटीबॉडीज के साथ पैदा हो रहे हैं। यह एंटीबॉडीज उनके अंदरूनी अंगों को प्रभावित कर देती है। सबसे बुरा असर बच्चों के दिल पर पड़ता है। दरअसल, कभी-कभी एंटीबॉडीज शरीर पर ही हमला करने लगती हैं।
चूंकि बच्चों के शरीर में बदलाव होते रहते हैं, इस कारण उन पर ये ज्यादा दुष्प्रभाव डालती हैं। रीजेंसी की वरिष्ठ बालरोग और सघन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कपूर ने पत्रकारों को बताया कि समय से इलाज होने से बच्चे ठीक हो जा रहे हैं। बीते साल सितंबर से अब तक अस्पताल में 55 बच्चों को इलाज से ठीक किया जा चुका है।
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चूंकि बच्चों के शरीर में बदलाव होते रहते हैं, इस कारण उन पर ये ज्यादा दुष्प्रभाव डालती हैं। रीजेंसी की वरिष्ठ बालरोग और सघन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कपूर ने पत्रकारों को बताया कि समय से इलाज होने से बच्चे ठीक हो जा रहे हैं। बीते साल सितंबर से अब तक अस्पताल में 55 बच्चों को इलाज से ठीक किया जा चुका है।
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डॉ. रश्मि कपूर ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर छोटे बच्चों के लिए अधिक खतरनाक मानी जा रही है। बच्चों में संक्रमण के एक माह के अंदर विभिन्न जटिलताएं पैदा हो जाती हैं, इस स्थिति को मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेटरी सिंड्रोम (एमआईएससी) कहते हैं।
इसमें नवजात को बुखार, शरीर पर चकत्ते, दस्त आदि लक्षण उभरते हैं। एंटीबॉडीज पॉजिटिव होने के साथ अन्य इन्फ्लामेटरी मार्कर बढ़ जाते हैं। ये हृदय, फेफड़े, गुुर्दे आदि अंग प्रभावित करते हैं। उचित उपचार न मिलने पर रोगी की मौत भी हो सकती है।
इस मौके पर नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी सिंह, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. तरुण चंद्रा ने रोग, उसके लक्षण और उपचार के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक से 18 वर्ष तक रोगी गंभीर अवस्था में भर्ती हो रहे हैं।
इसमें नवजात को बुखार, शरीर पर चकत्ते, दस्त आदि लक्षण उभरते हैं। एंटीबॉडीज पॉजिटिव होने के साथ अन्य इन्फ्लामेटरी मार्कर बढ़ जाते हैं। ये हृदय, फेफड़े, गुुर्दे आदि अंग प्रभावित करते हैं। उचित उपचार न मिलने पर रोगी की मौत भी हो सकती है।
इस मौके पर नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी सिंह, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. तरुण चंद्रा ने रोग, उसके लक्षण और उपचार के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक से 18 वर्ष तक रोगी गंभीर अवस्था में भर्ती हो रहे हैं।