ऑपरेशन में हुई लापरवाही मासूम की जान पर बन आई, डॉक्टर ने आंतें उलझी बताकर वसूले 1.30 लाख रुपये
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हालत में सुधार न होने पर उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया। जहां भर्ती से मना करने पर उसे लखनऊ भेज दिया गया। वहां भी डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। दुखी माता पिता सीएमओ और डीएम से डॉक्टर व अस्पताल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैँ।
बलराम ने 40 हजार रुपये जमा किए तो तीन फरवरी को बच्ची का ऑपरेशन किया गया। इसके बाद सर्जन दूसरे अस्पतालों में सेवा देने चले गए और अप्रशिक्षित कर्मचारी बच्ची की देखरेख करते रहे। बच्ची की हालत न सुधरने पर परिजनों ने शिकायत की तो कर्मचारियों ने धीरे-धीरे आराम मिलने का भरोसा दिलाया।
करीब एक लाख रुपये और ऐंठने के बाद बच्ची की हालत नाजुक देख 16 फरवरी को उसे कानपुर के हैलेट अस्पताल में रेफर कर दिया। बलराम जब मरणासन्न बेटी को वहां लेकर पहुंचे तो वहां भर्ती करने से इनकार कर दिया गया और केजीएमसीयू लखनऊ जाने की सलाह दी गई।
उन्होंने नर्सिंगहोम के डॉक्टर व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। उधर, सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि उन्हें अभी मामले की जानकारी नहीं है। प्रार्थना पत्र मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
जांच होने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
फर्रुखाबाद के मसेनी चौराहे से आवास विकास तक झोलाछापों के नर्सिंगहोम की मंडी है। गत माह सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में पंजीकृत सात नर्सिंगहोम चेक किए गए। किसी में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिला। हकीकत ये है कि झोलाछाप के भरोसे नर्सिंगहोम चलाए जा रहे हैं। कई नर्सिंगहोम में आपरेशन का ठेका लेने वाले सर्जन का नर्सिंगहोम भी इसमें शामिल था। एक माह बीतने के बाद भी प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सका।