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ऑपरेशन में हुई लापरवाही मासूम की जान पर बन आई, डॉक्टर ने आंतें उलझी बताकर वसूले 1.30 लाख रुपये

Thu, 20 Feb 2020 05:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 20 Feb 2020 05:28 PM IST
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child in danger due to carelessness in operation in farrukhabad
गोद मरणासन्न बेटी को लिए पिता - फोटो : अमर उजाला
फर्रुखाबाद में ऑपरेशन में हुई लापरवाही से मासूम की जान खतरे में पड़ गई। पेट दर्द की शिकायत होने पर पिता ने अपनी आठ साल की मासूम को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था। यहां अल्ट्रासाउंड के बाद बच्ची की आंते उलझी बताकर डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी।
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हालत में सुधार न होने पर उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया। जहां भर्ती से मना करने पर उसे लखनऊ भेज दिया गया। वहां भी डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। दुखी माता पिता सीएमओ और डीएम से डॉक्टर व अस्पताल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैँ। 
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दो फरवरी को कमालगंज के मोहल्ला लोहिया नगर निवासी मजदूर बलराम कश्यप की बेटी मोनिका (8) के पेट में को दर्द हुआ तो उसे एक निजि अस्पताल में भर्ती कराया गया। अल्ट्रासाउंड करवाने के बाद आंतें उलझी बताकर डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने को कहा। इसका खर्च एक लाख 30 हजार रुपये खर्च बताया।

बलराम ने 40 हजार रुपये जमा किए तो तीन फरवरी को बच्ची का ऑपरेशन किया गया। इसके बाद सर्जन दूसरे अस्पतालों में सेवा देने चले गए और अप्रशिक्षित कर्मचारी बच्ची की देखरेख करते रहे। बच्ची की हालत न सुधरने पर परिजनों ने शिकायत की तो कर्मचारियों ने धीरे-धीरे आराम मिलने का भरोसा दिलाया।

करीब एक लाख रुपये और ऐंठने के बाद बच्ची की हालत नाजुक देख 16 फरवरी को उसे कानपुर के हैलेट अस्पताल में रेफर कर दिया। बलराम जब मरणासन्न बेटी को वहां लेकर पहुंचे तो वहां भर्ती करने से इनकार कर दिया गया और केजीएमसीयू लखनऊ जाने की सलाह दी गई।
 

लखनऊ पहुंचने पर डॉक्टर ने बताया कि अब बच्ची बचना मुश्किल है। मायूस होकर परिजन लौट आए। बुधवार शाम बलराम, उनकी पत्नी राजेंद्री, सास रामधनी व साले गोपाल मोनिका को गोद में लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। सीएमओ के न मिलने पर प्रार्थना पत्र देकर वे डीएम से शिकायत करने कलक्ट्रेट चले गए।

उन्होंने नर्सिंगहोम के डॉक्टर व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। उधर, सीएमओ डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि उन्हें अभी मामले की जानकारी नहीं है। प्रार्थना पत्र मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
 
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आईएमए के सचिव डॉ.केएम द्विवेदी ने बताया कि जहां बच्ची का ऑपरेशन हुआ वहां लगातार बैठने को कोई फिजीशियन या एमबीबीएस डॉक्टर नहीं हैं। एक सर्जन के नाम पर चार नर्सिंगहोम संचालित होते हैं। कई नर्सिंगहोम में सर्जन ऑनकाल भी सेवा दे रहे हैं। झोलाछाप डॉक्टर इलाज कर रहे हैं। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। कार्रवाई के लिए वह फिर मुद्दा उठाएंगे।

जांच होने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई 
फर्रुखाबाद के मसेनी चौराहे से आवास विकास तक झोलाछापों के नर्सिंगहोम की मंडी है। गत माह सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में पंजीकृत सात नर्सिंगहोम चेक किए गए। किसी में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं मिला। हकीकत ये है कि झोलाछाप के भरोसे नर्सिंगहोम चलाए जा रहे हैं। कई नर्सिंगहोम में आपरेशन का ठेका लेने वाले सर्जन का नर्सिंगहोम भी इसमें शामिल था। एक माह बीतने के बाद भी प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सका। 
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