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KANPUR: मंकी पॉक्स में चिकन पॉक्स की वैक्सीन भी देती सुरक्षा, जरूरी जानकारी
Sun, 29 May 2022 10:54 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 29 May 2022 10:54 PM IST
सार
विशेषज्ञों ने बताया कि मंकी पॉक्स और चेचक के लक्षण मिलते-जुलते हैं। मंकी पॉक्स चेचक से कम संक्रामक होता है
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में बचपन में लगी चिकन पॉक्स की वैक्सीन भी मंकी पॉक्स से सुरक्षा चक्र प्रदान करती है। इसके लक्षण दो-चार सप्ताह रहते हैं। इसके बाद वायरस खुद मर जाता है। हालांकि कुछ रोगियों में जटिलताएं आ सकती हैं, जिससे खतरा पैदा होता है।
वैसे देश में मंकी पॉक्स का रोगी नहीं मिला लेकिन शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है। केस रिपोर्टिंग के लिए फॉर्म और सैंपल इकट्ठे करने की भी व्यवस्था हो गई है। इसके साथ ही कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप से शहर आने वालों पर नजर रखी जाएगी। इसके पहले कोरोना और जीका का भी संक्रमण बाहर से आने वालों के साथ आया था।
विशेषज्ञों ने बताया कि मंकी पॉक्स और चेचक के लक्षण मिलते-जुलते हैं। मंकी पॉक्स चेचक से कम संक्रामक होता है। गाइडलाइन में बताया गया कि अभी तक इस बीमारी का संक्रमण अफ्रीकी देशों की यात्रा करने वालों में मिला है। इसमें कहा गया है कि यह संक्रमण कटी-फटी त्वचा, सांस, नाक और आंख से शरीर के अंदर पहुंच जाता है।
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वैसे देश में मंकी पॉक्स का रोगी नहीं मिला लेकिन शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है। केस रिपोर्टिंग के लिए फॉर्म और सैंपल इकट्ठे करने की भी व्यवस्था हो गई है। इसके साथ ही कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप से शहर आने वालों पर नजर रखी जाएगी। इसके पहले कोरोना और जीका का भी संक्रमण बाहर से आने वालों के साथ आया था।
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विशेषज्ञों ने बताया कि मंकी पॉक्स और चेचक के लक्षण मिलते-जुलते हैं। मंकी पॉक्स चेचक से कम संक्रामक होता है। गाइडलाइन में बताया गया कि अभी तक इस बीमारी का संक्रमण अफ्रीकी देशों की यात्रा करने वालों में मिला है। इसमें कहा गया है कि यह संक्रमण कटी-फटी त्वचा, सांस, नाक और आंख से शरीर के अंदर पहुंच जाता है।
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अगर कोई संक्रमित है तो वह तब तक आइसोलेशन में रहे, जब तक घाव भरने के साथ त्वचा की नई परत न आ जाए। इसके साथ ही रोगी के चिह्नित होने के बाद 21 दिन पहले तक उसके संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाए। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि इसमें चिकन पॉक्स जैसे लक्षण होते हैं। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि अभी मंकी पॉक्स का कोई केस नहीं मिला है। बाहर से आने वालों पर नजर रखने के साथ अस्पतालों को सतर्क कर दिया गया। शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है।