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Kanpur: दस्तावेजों में गड़बड़ी कर नौकरी कर रहे प्रोफेसर को थमाई चार्जशीट, एक हफ्ते के भीतर देना होगा जवाब

Thu, 30 Jan 2025 11:02 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 30 Jan 2025 11:02 PM IST
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Charge sheet handed over to professor who was working by tampering with documents
सीएसए कैंपस - फोटो : सोशल मीडिया
दस्तावेजों में गड़बड़ी कर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में नौकरी पाने वाले प्लांट पैथोलॉजी के प्रोफेसर के खिलाफ प्रशासन ने चार्जशीट तैयार की है। इसे प्रोफेसर को सौंप कर एक हफ्ते में जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद कुलपति कार्रवाई करेंगे। प्रकरण में प्रोफेसर की बर्खास्तगी तय है। सीएसए में शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी प्लांट पैथोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. एसके बिस्वास ने पांच मार्च 2002 में दस्तावेजों में गड़बड़ी कर एससी कैटेगरी में विवि में जॉइनिंग पाई थी। नियमानुसार संस्थान में नौकरी पाने के लिए एससी कैटेगरी के अभ्यर्थी को यूपी का मूल निवासी होना जरूरी है। यूपी का मूल निवास प्रमाण पत्र या स्थाई निवास प्रमाण पत्र न होने पर अभ्यर्थी के दस्तावेजों को फर्जी मान लिया जाता है।
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वहीं, विवि प्रशासन जहां इस गड़बड़ी को पकड़ नहीं सका, वहीं उनको समय-समय पर पदोन्नति और वेतन वृद्धि तक मिलती रही। डॉ. बिस्वास बिना किसी परेशानी के पिछले 22 सालों से नौकरी कर रहे हैं। उनको राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पुरस्कार भी मिले हैं। एक शिकायत के बाद जब मामले की जांच हुई तो विवि की प्रबंध मंडल की बैठक में उनके निलंबन के आदेश दे दिए गए। हालांकि विवि की ओर से अभी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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मामले में कुलपति प्रो. एके सिंह ने बताया कि बैठक में निलंबन के आदेश के बाद डॉ. बिस्वास के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली गई है। सभी आरोप तय हैं और चार्जशीट उनको सौंप दी गई है। उनके जवाब का इंतजार हो रहा है, जवाब मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई की जाएगी।
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एक साल पहले शासन ने दिया था हटाने का आदेश
डॉ. बिस्वास की जांच लंबे समय से चल रही है। एक साल पहले शासन ने कुलपति को पत्र लिखकर उनको हटाने का आदेश दिया था, इसके बावजूद अभी तक वह विभाग में काम कर रहे हैं।
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