सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: ड्रिल मशीन से खोले गए थे लॉकर, फोरेंसिक जांच में खुलासा, बैंक और कंपनी कर्मचारियों की मिलीभगत
कानपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की कराची खाना शाखा के बैंक लॉकरों से गहने चोरी होने के मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट ने नया खुलासा किया है। इसके अनुसार, बैंक लॉकर ड्रिल मशीन से खोले गए थे। बैंक कर्मचारियों और लॉकर कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है।
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कराची खाना स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अंदर लगे लॉकरों की मजबूत सुरक्षा के लिए उनमें प्रतिष्ठित कंपनी के 50-50 हजार कीमत के लॉक लगाए गए थे। इसके बाद भी चोरों ने लॉकरों में बिना किसी तरह की तोड़फोड़ किए महज ड्रिल मशीन की मदद से खोल कर ग्राहकों के करोड़ों के गहने पार कर दिए।
इसका खुलासा फोरेंसिक की जांच में हुआ है। ऐसे में दिसंबर में 50 लॉकरों को खोलने के लिए लॉकर रूम में जाने वाले कंपनी के कर्मचारी और तत्कालीन बैंक अधिकारी ही पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस की जांच में पता चला कि लोहे की मोटी परतों से निर्मित इन 1141 लॉकरों की सुरक्षा के लिए इनमें गोदरेज कंपनी के विशेष लॉक लगवाए गए हैं। इनके मेंटीनेंस की जिम्मेदारी कंपनी ने मिराज इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर एके बाथम को दे रखी है। उन्होंने पुलिस को बताया कि एक लॉक की कीमत 50 हजार रुपये से अधिक की है और इसे खोल पाना हर किसी के बस की बात नहीं है।
वहीं, जब पुलिस ने फोरेंसिक टीम की मदद से लॉकरों की जांच की तो सभी में लोहे का बुरादा मिला, जो लॉकर में ड्रिल मशीन चलाते वक्त अंदर ही रह गया था। फोरेंसिक ने लॉकरों से रिपिट, नट-बोल्ट भी जुटाए हैं, जो लॉक में लगे थे और उसे खोलते वक्त अंदर ही छूट गए थे।
पुलिस का मानना है कि इस तरह के लॉक को खोलने के लिए तकनीक की जरूरत होती है, जो सिर्फ लॉक बनाने वाले या उसकी मरम्मत करने वालों के पास ही होती है। ऐसे में लॉकर रूम में ऑपरेट न होने वाले 50 लॉकरों को खोलने के लिए दिसंबर 2021 में दो दिनों तक अंदर जाने वाले कंपनी के आधा दर्जन कर्मचारियों से लेकर लॉकर इंचार्ज शुभम मालवीय और तत्कालीन बैंक मैनेजर रामप्रसाद भी शक के दायरे में आ चुके हैं।
जब लॉकर खोले तो क्यों नहीं कराई वीडियोग्राफी
शकुंतला देवी के बैंक लॉकर से भी चोरों ने 30 लाख के गहने पार कर दिए थे। उनके बेटे सीए एसके पोद्दार के अनुसार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से भारी चूक हुई है। आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार यदि कोई बैंक लंबे समय से बंद लॉकरों को खुलवाने की प्रक्रिया करती है, तो उसे इसकी वीडियोग्राफी भी करानी चाहिए, जबकि सेंट्रल बैंक की तरफ से न तो वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जा सकी और न ही सीसीटीवी कैमरों के फुटेज।
क्राइम ब्रांच ने डंप किया मोबाइल टॉवर
वारदात की जांच क्राइम ब्रांच के पाले में जा चुकी है। क्राइम ब्रांच की सर्विलांस सेल ने बुधवार को बैंक पहुंच कर लैपटॉप और डिवाइस की मदद से आसपास के मोबाइल टॉवर (बीटीएस) डंप किए हैं। लाखों नंबरों में से संदिग्ध नंबरों को छांट कर उनकी मदद से बदमाशों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
हमने जांच शुरू कर दी है। बीटीएस डंप कराया गया है। जांच में जो भी संदिग्ध पाए जाएंगे उनसे पूछताछ की जाएगी। जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। - सलमान ताज पाटिल, डीसीपी क्राइम