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CBSE 10th Result: डॉक्टर बनना चाहती है 99.2 फीसदी अंक लाने वाली देवांशी, राजनीति को बताया सबसे खराब क्षेत्र
Thu, 16 Jul 2020 12:02 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 16 Jul 2020 12:02 AM IST
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देवांशी पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
99.2 प्रतिशत अंकों के साथ सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में जिला टॉप करने वाली देवांशी पांडेय के परिजनों खासकर मां की खुशी का ठिकाना नहीं है। देवांशी इस सफलता से खुश है और आने वाली चुनौतियां के लिए तैयार भी। उसका लक्ष्य स्पष्ट है। वह आगे चलकर डाक्टर बनकर दिवंगत पिता के सपनों को साकार करना चाहती है।
महर्षि विद्या मंदिर सीनियर सेकंडरी स्कूल की मेधावी देवांशी पांडेय के पिता परिषदीय शिक्षक डॉ. संजय पांडेय का दो दिसंबर 2016 को हार्टअटैक से निधन हो गया था। इसके बाद ही देवांशी ने डाक्टर बनकर ऐसे रोगियों की जान बचाने का संकल्प लिया था जिनकी सही इलाज के अभाव में असमय मौत हो जाती है।
परिषदीय विद्यालय की शिक्षक मां रानी देवी उनको इसके लिए लगातार प्रेरित कर रहीं हैं। छोटा भाई ईशांत कुमार पांडेय टूथ मिशन स्कूल में छठवीं का छात्र है। देवांशी का कहना है कि डाक्टर दूसरे का दर्द समझने के साथ उसका निवारण भी करता है। उसकी भी इच्छा आगे चलकर ऐसा करने की है। आगे की पढ़ाई इसी स्कूल में जारी रखते हुए 12वीं में भी टॉप करने का लक्ष्य है। इस सफलता का श्रेय वे गुरुजनों के साथ मां को भी देती हैं।
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महर्षि विद्या मंदिर सीनियर सेकंडरी स्कूल की मेधावी देवांशी पांडेय के पिता परिषदीय शिक्षक डॉ. संजय पांडेय का दो दिसंबर 2016 को हार्टअटैक से निधन हो गया था। इसके बाद ही देवांशी ने डाक्टर बनकर ऐसे रोगियों की जान बचाने का संकल्प लिया था जिनकी सही इलाज के अभाव में असमय मौत हो जाती है।
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परिषदीय विद्यालय की शिक्षक मां रानी देवी उनको इसके लिए लगातार प्रेरित कर रहीं हैं। छोटा भाई ईशांत कुमार पांडेय टूथ मिशन स्कूल में छठवीं का छात्र है। देवांशी का कहना है कि डाक्टर दूसरे का दर्द समझने के साथ उसका निवारण भी करता है। उसकी भी इच्छा आगे चलकर ऐसा करने की है। आगे की पढ़ाई इसी स्कूल में जारी रखते हुए 12वीं में भी टॉप करने का लक्ष्य है। इस सफलता का श्रेय वे गुरुजनों के साथ मां को भी देती हैं।
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राजनीति का क्षेत्र नहीं पसंद
देवांशी से पूछा गया कि ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां वह अपना कॅरियर नहीं बनाना चाहेंगी तो वे तपाक से बोलीं, राजनीति। कहा, वर्तमान परिवेश में ये क्षेत्र सबसे खराब है। वह कभी भी इसमें जाना पसंद नहीं करेगी। हालांकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वश्रेष्ठ नेता मानती हैं।
व्हाट्सएप और फेसबुक से दूर रहकर पाई सफलता
मेधावी के पास व्यक्तिगत फोन नहीं है। उसका फेसबुक और व्हाट्सएप से दूर-दूर का नाता नहीं है। मां के फोन का उपयोग वह किसी विषय का कांसेप्ट स्पष्ट करने में करती हैं। बताया कि पढाई तब तक की जानी चाहिए, जब तक उसकी विषय वस्तु स्पष्ट न हो जाए। मां का सहयोग लेकर परीक्षा की तैयारी की है। स्कूल के अलावा घर में तीन से चार घंटे पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की है।
बच्चों को न दें एंड्रायड फोन
देवांशी ने अपनी सफलता का राज साझा करते हुए सभी अभिभावकों से यह अपील भी की कि वह अपने बच्चों को एंड्रायड मोबाइल न दें। बताया कि जरूरत पड़ने पर अपना फोन देकर छात्र-छात्रा की पढ़ाई में सहयोग करें। इससे बच्चा फोन का दुरुपयोग करने से बचा रहे।
देवांशी से पूछा गया कि ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां वह अपना कॅरियर नहीं बनाना चाहेंगी तो वे तपाक से बोलीं, राजनीति। कहा, वर्तमान परिवेश में ये क्षेत्र सबसे खराब है। वह कभी भी इसमें जाना पसंद नहीं करेगी। हालांकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वश्रेष्ठ नेता मानती हैं।
व्हाट्सएप और फेसबुक से दूर रहकर पाई सफलता
मेधावी के पास व्यक्तिगत फोन नहीं है। उसका फेसबुक और व्हाट्सएप से दूर-दूर का नाता नहीं है। मां के फोन का उपयोग वह किसी विषय का कांसेप्ट स्पष्ट करने में करती हैं। बताया कि पढाई तब तक की जानी चाहिए, जब तक उसकी विषय वस्तु स्पष्ट न हो जाए। मां का सहयोग लेकर परीक्षा की तैयारी की है। स्कूल के अलावा घर में तीन से चार घंटे पढ़ाई कर यह सफलता हासिल की है।
बच्चों को न दें एंड्रायड फोन
देवांशी ने अपनी सफलता का राज साझा करते हुए सभी अभिभावकों से यह अपील भी की कि वह अपने बच्चों को एंड्रायड मोबाइल न दें। बताया कि जरूरत पड़ने पर अपना फोन देकर छात्र-छात्रा की पढ़ाई में सहयोग करें। इससे बच्चा फोन का दुरुपयोग करने से बचा रहे।