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सीबीआई ने फोरेंसिक जांच के लिए उत्तर पुस्तिकाएं भिजवाईं, तीन सदस्यीय टीम ने चार और लोगों के बयान दर्ज किए
Sun, 27 Sep 2020 03:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 27 Sep 2020 03:27 PM IST
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : Social Media
डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) कॉम्प्लेक्स स्थित सामान्य वस्तु नियंत्रणालय में वर्ष 2016 में छह क्लर्कों की भर्ती घोटाले के संबंध में सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने अब तक कुल 20 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। शनिवार को दूसरे दिन की जांच में चार लोगों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए गए।
शुक्रवार को 16 लोगों से पूछताछ हुई थी। उधर, भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल हुई उत्तर पुस्तिकाओं को सीबीआई ने फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। इसके बाद ही इस तथ्य की पुष्टि होगी कि उत्तर पुस्तिकाओं में सफेद रंग की स्याही लगाकर मेधावियों के सही जवाब गलत कर दिए गए थे। हालांकि दो दिन की जांच में सीबीआई को भर्ती घोटाले से जुड़े कई और सबूत हाथ लगे हैं, लेकिन तमाम सबूत मिटाने के साक्ष्य मिले हैं।
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शुक्रवार को 16 लोगों से पूछताछ हुई थी। उधर, भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल हुई उत्तर पुस्तिकाओं को सीबीआई ने फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। इसके बाद ही इस तथ्य की पुष्टि होगी कि उत्तर पुस्तिकाओं में सफेद रंग की स्याही लगाकर मेधावियों के सही जवाब गलत कर दिए गए थे। हालांकि दो दिन की जांच में सीबीआई को भर्ती घोटाले से जुड़े कई और सबूत हाथ लगे हैं, लेकिन तमाम सबूत मिटाने के साक्ष्य मिले हैं।
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माना जा रहा है कि भर्ती घोटाले के तथ्यों को सीबीआई की नजर से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जिन 20 लोगों से पूछताछ हुई है, उनमें से 12 लोगों को सूचीबद्ध किया गया है। जांच इन्हीं के इर्द गिर्द रहेगी। इनके अलावा अब अन्य लोगों से पूछताछ की जरूरत पड़ी तो उन्हें लखनऊ बुलाया जाएगा। जांच के दौरान सीबीआई के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी व क्लर्कों के चयन के लिए बनाए गए ऑफीसर्स बोर्ड के चेयरमैन लंबे समय से एक ही कुर्सी पर डटे हैं। आरोपों के बाद भी इन्हें नहीं हटाया गया।
ये है मामला
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली मुख्यालय में तैनात डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए एक आदेश करके उसमें वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। उन्हीं की देखरख में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई थी।
परीक्षा में अव्वल आने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत कई अभ्यर्थियों ने रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए और सीबीआई से लिखित रूप में की थी। शिकायत में आरोप है कि चेयरमैन संतोष तिवारी ने विभाग के ही ऑफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर फर्जीवाड़ा किया।
ये है मामला
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली मुख्यालय में तैनात डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए एक आदेश करके उसमें वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। उन्हीं की देखरख में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई थी।
परीक्षा में अव्वल आने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत कई अभ्यर्थियों ने रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए और सीबीआई से लिखित रूप में की थी। शिकायत में आरोप है कि चेयरमैन संतोष तिवारी ने विभाग के ही ऑफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर फर्जीवाड़ा किया।