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छात्राओं से छेड़खानी का मामला: आरोपी एचबीटीयू के प्रोफेसरों को नहीं मिली अग्रिम जमानत
Thu, 15 Sep 2022 07:48 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 15 Sep 2022 07:48 AM IST
सार
एचबीटीयू में एमबीए कर रही दो छात्राओं ने प्रोफेसरों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। मामले में दोनों छात्राओं ने नवाबगंज थाने में अलग-अलग दो एफआईआर दर्ज कराईं थीं।
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एचबीटीयू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में छात्राओं से छेड़छाड़, मानसिक उत्पीड़न व षड्यंत्र के आरोपी एचबीटीयू के दो प्रोफेसरों की अग्रिम जमानत अर्जी जिला जज संदीप जैन ने खारिज कर दी है। एचबीटीयू में एमबीए कर रही दो छात्राओं ने प्रोफेसरों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। मामले में दोनों छात्राओं ने नवाबगंज थाने में अलग-अलग दो एफआईआर दर्ज कराईं थीं।
इसमें प्रोफेसर विनोद कुमार यादव, हरश्मीत कौर सलूजा व अंचित अग्रवाल को आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख हरश्मीत व अंचित की ओर से दोनों मुकदमों में अलग-अलग अग्रिम जमानत अर्जियां दाखिल की गई थीं। एडीजीसी रवींद्र अवस्थी व बार एसोसिएशन अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट में तर्क रखा कि आरोपी शिक्षक हैं।
छात्राओं के उत्पीड़न में शामिल रहे हैं। पुलिस विवेचना कर रही है। अग्रिम जमानत की कोई जरूरत नहीं है। वहीं प्रोफेसरों की ओर से झूठा फंसाए जाने, पुलिस द्वारा उत्पीड़न करने, विवेचना में सहयोग के बावजूद उनकी गिरफ्तारी की आशंका की बात कही गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों प्रोफेसरों की चारों जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।
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इसमें प्रोफेसर विनोद कुमार यादव, हरश्मीत कौर सलूजा व अंचित अग्रवाल को आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी की तलवार लटकती देख हरश्मीत व अंचित की ओर से दोनों मुकदमों में अलग-अलग अग्रिम जमानत अर्जियां दाखिल की गई थीं। एडीजीसी रवींद्र अवस्थी व बार एसोसिएशन अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट में तर्क रखा कि आरोपी शिक्षक हैं।
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छात्राओं के उत्पीड़न में शामिल रहे हैं। पुलिस विवेचना कर रही है। अग्रिम जमानत की कोई जरूरत नहीं है। वहीं प्रोफेसरों की ओर से झूठा फंसाए जाने, पुलिस द्वारा उत्पीड़न करने, विवेचना में सहयोग के बावजूद उनकी गिरफ्तारी की आशंका की बात कही गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों प्रोफेसरों की चारों जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।
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