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कानपुर: संपत्ति में खेल के बाद भी आरोपियों के पक्ष में लगी थी रिपोर्ट, शत्रु संपत्ति का मामला
Fri, 12 Feb 2021 11:48 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 12 Feb 2021 11:48 AM IST
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कोर्ट ने सुनाया फैसला
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में बेकनगंज के प्राचीन मंदिर पर कब्जा कर उसे शत्रु संपत्ति दर्शा कर खरीद-फरोख्त के मामले में जिला प्रशासन को सौंपी गई रिपोर्ट में खेल किया गया था। मामले की जांच कर रहे पूर्व एसीएम तीन ने नगर निगम के अभिलेखों में खेल होने के बाद भी बिना किसी आपत्ति के आरोपियों के पक्ष में ही अपनी रिपोर्ट लगा दी थी।
जबकि, एक ही संपत्ति को निश्चित समय के बाद मामूली सा बदलाव कर दो अलग-अलग पतों के रूप में दिखा दिया गया था। शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति की कैसर जहां ने तत्कालीन डीएम विजय विश्वास पंत से इस संबंध में शिकायत की थी, जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन एसीएम तीन को जांच सौंपी थी।
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जबकि, एक ही संपत्ति को निश्चित समय के बाद मामूली सा बदलाव कर दो अलग-अलग पतों के रूप में दिखा दिया गया था। शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति की कैसर जहां ने तत्कालीन डीएम विजय विश्वास पंत से इस संबंध में शिकायत की थी, जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन एसीएम तीन को जांच सौंपी थी।
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एसीएम ने बयानों और दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति की खरीद-फरोख्त को सही ठहराया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बदले गए पते के आधार पर मंदिर को निजी संपत्ति बताया था, जिससे उसे बेचने का अधिकारी होने की बात कही थी। सन 1927 से 1948 तक प्राचीन मंदिर का पता 99/14 बेकनगंज दर्ज था।
इसके बाद 1953 से 1958 में प्राचीन मंदिर के पते को नगर निगम की पंचसाला (पंचवर्षीय रिपोर्ट) में दो भाग में दर्शाया गया, जिसमें एक का पता 99/14 व दूसरे भाग को 99/14-ए के रूप में दर्शाया गया। इस समयांतराल में पते में हुए बदलाव को लेकर एसीएम ने भी कोई आपत्ति अपनी रिपोर्ट में दर्ज नहीं कराई थी।
एसीएम ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी तो दी थी लेकिन, एक ही इमारत को दो भाग में कैसे कर दिया गया, इसकी जानकारी नहीं दे सके थे। इसके बाद भी रिपोर्ट खरीद-फरोख्त करने वालों के पक्ष में लगा दी गई थी।
इसके बाद 1953 से 1958 में प्राचीन मंदिर के पते को नगर निगम की पंचसाला (पंचवर्षीय रिपोर्ट) में दो भाग में दर्शाया गया, जिसमें एक का पता 99/14 व दूसरे भाग को 99/14-ए के रूप में दर्शाया गया। इस समयांतराल में पते में हुए बदलाव को लेकर एसीएम ने भी कोई आपत्ति अपनी रिपोर्ट में दर्ज नहीं कराई थी।
एसीएम ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी तो दी थी लेकिन, एक ही इमारत को दो भाग में कैसे कर दिया गया, इसकी जानकारी नहीं दे सके थे। इसके बाद भी रिपोर्ट खरीद-फरोख्त करने वालों के पक्ष में लगा दी गई थी।