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बीजेपी का धमाल, छावनी में भी कमाल
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Tue, 13 Jan 2015 03:04 AM IST
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छावनी बोर्ड चुनाव में भाजपा ने परचम लहराया है। पार्टी से समर्थित चार प्रत्याशियों को जीत मिली है। कांग्रेस समर्थित एक भी प्रत्याशी नहीं जीत सका। बाकी चार सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों का कब्जा रहा।
सबसे अधिक अंतर से वार्ड तीन से भाजपा उम्मीदवार लखन ओमर को जीत हासिल हुई है। लंबे समय से जीत रहे नवाब अली इस बार चुनाव हार गए हैं। कैंट क्षेत्र में पिछले एक महीने से भी अधिक समय से चल रह चुनावी हलचल सोमवार को दोपहर बाद शांत हो गई।
सुबह 9 बजे से कैंट बोर्ड मुख्यालय परिसर में मतगणना शुरू हुई। कैंट चुनाव में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल हुआ। इस वजह से एक घंटे के बाद से ही परिणाम आने शुरू हो गए।
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साढ़े बारह बजे तक मतगणना पूरी हो गई। विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थक गाजे बाजे के साथ नाचने लगे थे, हारने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थक मायूस होकर, चुनाव व्यवस्था में खोट की बात कहते वहां से चले गए।
कैंट चुनाव में मात्र 45 फीसदी वोटिंग होने से यह तय हो गया था कि प्रत्याशियों में हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं होने वाला है। कुछ प्रत्याशियों को छोड़कर बाकी एक हजार या इससे कम अंतर से हारे।
सभी जीते हुए प्रत्याशियों को ब्रिगेडियर पी सक्सेना, रिटर्निंग ऑफिसर शारदा प्रसाद यादव और बोर्ड के सीईओ अमित कुमार ने बधाई दी।
94 वर्षीय निहालचंद ने आठवीं बार बाजी मारी
94 वर्षीय निहालचंद को वार्ड छह से आखिर फिर विजयश्री मिली है। पिछले 50 साल से छावनी बोर्ड का चुनाव लड़ते आ रहे निहाल को लगातार सात बार जीत हासिल हुई है।
बीच में तीन बार उन्हें शिकस्त खानी पड़ी, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ।
पिछली बार के सभासद रसीद ड्रामा को उन्होंने करीब एक हजार वोटों से पटकनी दे दी है। इतनी उम्र में निहालचंद का हौसला देखते हुए बनता है।
ब्रिटिश पीरिएड में बंदरों की लंदन में सप्लाई करने का काम करने वाले निहालचंद अब भी परिवार के साथ इलेक्ट्रानिक्स का धंधा करते हैं।
यह काम उन्होंने 1954 से शुरू किया। क्षेत्र में इन्हें लोग बंदरवाले के नाम से जानते हैं। निहाल 1964 में पहली बार छावनी बोर्ड चुनाव में उतरे और जीत गए। उसके बाद से लगातार जीत हासिल करते रहे।
1992 के चुनाव में वे हार गए। इसके बाद अब उन्होंने फिर अपना पुराना रुतबा वापस पा लिया है। चुनाव प्रचार के दौरान वह लोगों के दो से तीन मंजिला मकानों की सीढ़ियां चढ़कर अपने समर्थन में वोट देने की मांग करते थे।
रविवार को जिस समय मतगणना शुरू हुई, वह अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त दिखे।
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सबसे अधिक अंतर से वार्ड तीन से भाजपा उम्मीदवार लखन ओमर को जीत हासिल हुई है। लंबे समय से जीत रहे नवाब अली इस बार चुनाव हार गए हैं। कैंट क्षेत्र में पिछले एक महीने से भी अधिक समय से चल रह चुनावी हलचल सोमवार को दोपहर बाद शांत हो गई।
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सुबह 9 बजे से कैंट बोर्ड मुख्यालय परिसर में मतगणना शुरू हुई। कैंट चुनाव में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल हुआ। इस वजह से एक घंटे के बाद से ही परिणाम आने शुरू हो गए।
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साढ़े बारह बजे तक मतगणना पूरी हो गई। विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थक गाजे बाजे के साथ नाचने लगे थे, हारने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थक मायूस होकर, चुनाव व्यवस्था में खोट की बात कहते वहां से चले गए।
कैंट चुनाव में मात्र 45 फीसदी वोटिंग होने से यह तय हो गया था कि प्रत्याशियों में हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं होने वाला है। कुछ प्रत्याशियों को छोड़कर बाकी एक हजार या इससे कम अंतर से हारे।
सभी जीते हुए प्रत्याशियों को ब्रिगेडियर पी सक्सेना, रिटर्निंग ऑफिसर शारदा प्रसाद यादव और बोर्ड के सीईओ अमित कुमार ने बधाई दी।
94 वर्षीय निहालचंद ने आठवीं बार बाजी मारी
94 वर्षीय निहालचंद को वार्ड छह से आखिर फिर विजयश्री मिली है। पिछले 50 साल से छावनी बोर्ड का चुनाव लड़ते आ रहे निहाल को लगातार सात बार जीत हासिल हुई है।
बीच में तीन बार उन्हें शिकस्त खानी पड़ी, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ।
पिछली बार के सभासद रसीद ड्रामा को उन्होंने करीब एक हजार वोटों से पटकनी दे दी है। इतनी उम्र में निहालचंद का हौसला देखते हुए बनता है।
ब्रिटिश पीरिएड में बंदरों की लंदन में सप्लाई करने का काम करने वाले निहालचंद अब भी परिवार के साथ इलेक्ट्रानिक्स का धंधा करते हैं।
यह काम उन्होंने 1954 से शुरू किया। क्षेत्र में इन्हें लोग बंदरवाले के नाम से जानते हैं। निहाल 1964 में पहली बार छावनी बोर्ड चुनाव में उतरे और जीत गए। उसके बाद से लगातार जीत हासिल करते रहे।
1992 के चुनाव में वे हार गए। इसके बाद अब उन्होंने फिर अपना पुराना रुतबा वापस पा लिया है। चुनाव प्रचार के दौरान वह लोगों के दो से तीन मंजिला मकानों की सीढ़ियां चढ़कर अपने समर्थन में वोट देने की मांग करते थे।
रविवार को जिस समय मतगणना शुरू हुई, वह अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त दिखे।