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एचबीटीयू में वित्तीय अनियमितता, दस कर्मचारियों को दे दिया अधिक वेतनमान, अब वसूली का आदेश
Wed, 31 Jul 2019 12:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 31 Jul 2019 12:38 PM IST
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एचबीटीयू
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कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। वर्ष 2014 में यहां में दस लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को निर्धारित नियम से अधिक वेतनमान दे दिया गया था। ऑडिट में आपत्ति आने के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन से इस बाबत सुझाव मांगा है।
विश्वविद्यालय में दस कर्मचारियों का वेतनमान वर्ष 2014 में 2400 से बढ़ाकर 2800 होना था लेकिन इसे तत्कालीन विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों ने 4200 कर दिया था। जब इसका ऑडिट हुआ तो महालेखाकार कार्यालय ने इस पर आपत्ति दर्ज करा दी। बढ़े हुए वेतनमान का शासनादेश मांगा तो विश्वविद्यालय प्रशासन जवाब नहीं दे पाया।
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विश्वविद्यालय में दस कर्मचारियों का वेतनमान वर्ष 2014 में 2400 से बढ़ाकर 2800 होना था लेकिन इसे तत्कालीन विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों ने 4200 कर दिया था। जब इसका ऑडिट हुआ तो महालेखाकार कार्यालय ने इस पर आपत्ति दर्ज करा दी। बढ़े हुए वेतनमान का शासनादेश मांगा तो विश्वविद्यालय प्रशासन जवाब नहीं दे पाया।
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बताया जाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस दौरान शासन के मौखिक आदेश पर वेतनमान में बढ़ोतरी कर दी थी लेकिन इसका कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। अब महालेखाकार विभाग ने 2014 से अभी तक दिए गए बढ़े वेतनमान की वसूली का आदेश दिया है। कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने कहा कि मामले में कार्यवाही चल रही है। इससे जुड़ी सभी फाइलों का अध्ययन करने के बाद ही वह इस पर आगे की जानकारी दे सकेंगे।
विवाद खत्म होने तक नया लाभ नहीं मिलेगा
ऑडिट आपत्ति के बाद विवि प्रशासन ने सभी दस कर्मचारियों का वेतनमान 4200 पर ही रोक दिया है। मतलब इन्हें आगे किसी तरह का लाभ तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक पुराना विवाद निस्तारित नहीं होता।
विवाद खत्म होने तक नया लाभ नहीं मिलेगा
ऑडिट आपत्ति के बाद विवि प्रशासन ने सभी दस कर्मचारियों का वेतनमान 4200 पर ही रोक दिया है। मतलब इन्हें आगे किसी तरह का लाभ तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक पुराना विवाद निस्तारित नहीं होता।