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बुंदेलों ने काले कपड़े पहन मोदी को लिखे खून से खत, बोले बुंदेलखंड राज्य बनाकर सुधारें ऐतिहासिक गलती
Fri, 01 Nov 2019 07:49 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, महोबा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 01 Nov 2019 07:49 PM IST
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बुंदेलों ने काले कपड़े पहन मोदी को लिखे खून से खत
- फोटो : अमर उजाला
पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 492 दिन से अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने शुक्रवार को अपने साथियों के साथ काले कपड़े पहनकर काला दिवस मनाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से खत लिख कर उनको 1956 का वो काला दिन याद दिलाया। बोले जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड के दो टुकड़े कर उसे भारत के नक्शे से मिटा दिया था।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे बुंदेलखंड राज्य बनाकर उस ऐतिहासिक भूल को सुधारें और पिछड़े बुंदेलखंड की जनता के साथ न्याय करें। आल्हा चौक में अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक ने कहा कि 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब बुंदेलखंड राज्य था और नौगांव इसकी राजधानी थी। चरखारी के कामता प्रसाद सक्सेना मुख्यमंत्री थे लेकिन 12 मार्च 1948 को बुंदेलखंड का नाम बदलकर विन्ध्य प्रदेश कर दिया गया और इसमें बघेलखंड को जोड़ दिया गया।
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उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे बुंदेलखंड राज्य बनाकर उस ऐतिहासिक भूल को सुधारें और पिछड़े बुंदेलखंड की जनता के साथ न्याय करें। आल्हा चौक में अनशन पर बैठे बुंदेली समाज के संयोजक ने कहा कि 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब बुंदेलखंड राज्य था और नौगांव इसकी राजधानी थी। चरखारी के कामता प्रसाद सक्सेना मुख्यमंत्री थे लेकिन 12 मार्च 1948 को बुंदेलखंड का नाम बदलकर विन्ध्य प्रदेश कर दिया गया और इसमें बघेलखंड को जोड़ दिया गया।
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पीएम मोदी
- फोटो : गूगल
एक नवंबर 1956 बुंदेलखंड के इतिहास का वो काला दिन है जब बुंदेलखंड के दो टुकड़े कर उसको भारत के नक्शे से मिटा दिया गया था। आधा हिस्सा यूपी और आधा हिस्सा एमपी में शामिल कर दिया गया था। तभी से बुंदेलखंड दो बड़े राज्यों के बीच पिस रहा है। तत्कालीन नेहरू सरकार ने प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य सरदार केएम पणिक्कर की बुंदेलखंड राज्य बनाए रखने की सिफारिश को दरकिनार करते हुए यह फैसला लिया था।
आयोग ने 30 दिसंबर 1955 को जो रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, उसमें 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश बनाने की सिफारिश की थी। जिसमें थोड़ा बदलाव करके नेहरू सरकार ने 14 राज्य व 5 केंद्र शासित प्रदेश बना दिए।
अगर उस समय बुंदेलखंड के सांसद, विधायक सरकार के इस फैसले का विरोध कर देते तो आज बुंदेलखंड की ये दशा न होती और हम देश के सबसे पिछड़े इलाके में न गिने जाते। एक नवंबर को काला दिवस मनाते हुए तारा पाटकर, दिल्ली से आए अरविंद बुधौलिया, बुंदेली समाज के महामंत्री अजय बरसैया, देवेंद्र तिवारी, ग्यासीलाल आदि ने अपना खून देकर खत लिखा। जिसमें मोदी सरकार से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाए जाने की मांग की है।
आयोग ने 30 दिसंबर 1955 को जो रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी थी, उसमें 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश बनाने की सिफारिश की थी। जिसमें थोड़ा बदलाव करके नेहरू सरकार ने 14 राज्य व 5 केंद्र शासित प्रदेश बना दिए।
अगर उस समय बुंदेलखंड के सांसद, विधायक सरकार के इस फैसले का विरोध कर देते तो आज बुंदेलखंड की ये दशा न होती और हम देश के सबसे पिछड़े इलाके में न गिने जाते। एक नवंबर को काला दिवस मनाते हुए तारा पाटकर, दिल्ली से आए अरविंद बुधौलिया, बुंदेली समाज के महामंत्री अजय बरसैया, देवेंद्र तिवारी, ग्यासीलाल आदि ने अपना खून देकर खत लिखा। जिसमें मोदी सरकार से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाए जाने की मांग की है।