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मकान और तीन बीघा जमीन के लिए कत्ल: पिता ने भाई को दे दी भूमि, इसी खुन्नस में भाई को अगवा कर मार डाला
Tue, 25 Aug 2026 03:36 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, चित्रकूट
अमर उजाला नेटवर्क, चित्रकूट
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 25 Aug 2026 03:36 PM IST
सार
चित्रकूट के बैहार गांव में एक मकान व जमीन के लिए सगे भाई ने ही बड़े भाई मनोज की जान ले ली। आरोपी भाई खुन्नस में था कि पिता ने बड़े के नाम अपना मकान और जमीन क्यों कर दी। उसने पिता की मौत के बाद मनोज (मृतक) से जमीन हथियाने की कोशिश भी की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उसने बेटे के साथ मिलकर भाई की हत्या की साजिश रच डाली।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चित्रकूट के भरतकूप थाना क्षेत्र के बैहार गांव में मकान और सात बीघा जमीन के लिए सगे भाई ने छोटे भाई का अपहरण कर गला घोंटकर मार डाला। खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद उसने शव को झांसी के लहचूरा बांध में फेंक दिया। पुलिस ने सीसीटीवी की मदद से आरोपी भाई अनिल पाल, भतीजा हिमांशु पाल और उसके साथी रोहित साहू व राजू पाल को गिरफ्तार कर लिया। घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई है। शव अभी नहीं मिला है।
पुलिस के मुताबिक, बैहर की महिला पट्टू देवी ने 20 अगस्त को बताया कि उनका पति मनोज पाल (50) 19 अगस्त की सुबह ई-रिक्शा चलाने घर से निकला था। लेकिन वह घर नहीं लौटा। उसका ई-रिक्शा चौहान ढाबा के पास मिला। आसपास के लोगों से पता चला कि 19 अगस्त की शाम करीब साढ़े सात बजे कार सवार कुछ लोग मनोज को कार में डालकर ले गए। पुलिस ने अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी खंगलाने पर पता चला कि मनोज का अपहरण करने वालों में भाई अनिल, उसका बेटा अपने दो साथियों के साथ शामिल है। कार अनिल के बेटे हिमांशु के नाम पर है।
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पुलिस के मुताबिक, बैहर की महिला पट्टू देवी ने 20 अगस्त को बताया कि उनका पति मनोज पाल (50) 19 अगस्त की सुबह ई-रिक्शा चलाने घर से निकला था। लेकिन वह घर नहीं लौटा। उसका ई-रिक्शा चौहान ढाबा के पास मिला। आसपास के लोगों से पता चला कि 19 अगस्त की शाम करीब साढ़े सात बजे कार सवार कुछ लोग मनोज को कार में डालकर ले गए। पुलिस ने अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी खंगलाने पर पता चला कि मनोज का अपहरण करने वालों में भाई अनिल, उसका बेटा अपने दो साथियों के साथ शामिल है। कार अनिल के बेटे हिमांशु के नाम पर है।
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मनोज ने दस्तखत से किया था इन्कार, भतीजे ने कर दी हत्या
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि अपहरण के बाद वह लोग महोबा होते हुए कार को झांसी ले गए। मनोज को कागज पर दस्तखत करने के लिए कहा। उसने इन्कार कर दिया। जान से मारने की धमकी दी। लेकिन, फिर भी न माना। फिर गुस्से में भतीज हिमांशु ने मनोज का गला घोंट दिया। शव को बोरे में भरकर बांध में फेंक दिया।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि अपहरण के बाद वह लोग महोबा होते हुए कार को झांसी ले गए। मनोज को कागज पर दस्तखत करने के लिए कहा। उसने इन्कार कर दिया। जान से मारने की धमकी दी। लेकिन, फिर भी न माना। फिर गुस्से में भतीज हिमांशु ने मनोज का गला घोंट दिया। शव को बोरे में भरकर बांध में फेंक दिया।
सवाल...अपहरण के दौरान कहां रखा गया मनोज
मनोज का अपहरण 19 अगस्त को किया गया। हत्या हुई 20 अगस्त को। 19 और 20 अगस्त के बीच मनोज को कहां रखा गया। इस सवाल का जवाब अब भी पुलिस खोज रही है। आरोपियों ने इस बारे में अब तक पुलिस को कुछ नहीं बताया है।
मनोज का अपहरण 19 अगस्त को किया गया। हत्या हुई 20 अगस्त को। 19 और 20 अगस्त के बीच मनोज को कहां रखा गया। इस सवाल का जवाब अब भी पुलिस खोज रही है। आरोपियों ने इस बारे में अब तक पुलिस को कुछ नहीं बताया है।
पिता ने भाई को दे दी जमीन, इसी खुन्नस में रची थी हत्या की साजिश
चित्रकूट के बैहार गांव में एक मकान व जमीन के लिए सगे भाई ने ही बड़े भाई मनोज की जान ले ली। आरोपी भाई खुन्नस में था कि पिता ने बड़े के नाम अपना मकान और जमीन क्यों कर दी। उसने पिता की मौत के बाद मनोज (मृतक) से जमीन हथियाने की कोशिश भी की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उसने बेटे के साथ मिलकर भाई की हत्या की साजिश रच डाली।
चित्रकूट के बैहार गांव में एक मकान व जमीन के लिए सगे भाई ने ही बड़े भाई मनोज की जान ले ली। आरोपी भाई खुन्नस में था कि पिता ने बड़े के नाम अपना मकान और जमीन क्यों कर दी। उसने पिता की मौत के बाद मनोज (मृतक) से जमीन हथियाने की कोशिश भी की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उसने बेटे के साथ मिलकर भाई की हत्या की साजिश रच डाली।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि बैहार निवासी मनोज के पिता देवी चरन के तीन मकान थे। एक मकान मनोज व दूसरा मकान अनिल के नाम किया था और तीसरा मकान अपने नाम खरीदा था। इसके साथ ही पैतृक गांव बांदा जिले के जसपुरा थाना के गौरी कलां में सात बीघा जमीन थी। देवी चरन ने मृत्यु के पहले अपनी वरासत मनोज के नाम कर दी थी।
इससे आरोपी अनिल पाल भाई मनोज से खुन्नस मान रहा था। वह लंबे समय से मनोज के हिस्से का मकान व जमीन हड़पना चाहता था। वरासत की जमीन को लेकर कई बार पंचायत भी हुई लेकिन मनोज ने इसे देने से मना कर दिया था।
इसके बाद अनिल ने बेटे हिमांशु और उसके साथी रोहित व राजू के साथ मनोज का अपहरण कर मकान व जमीन अपने नाम कराने का प्लान बनाया। प्लान के तहत उसे लगा कि शव बोरे में बंद कर लहचूरा बांध में फेंक देगा तो बांध में पानी अधिक होने से शव बह जाएगा। भाई होने के नाते कोई उन पर शक भी नहीं करेगा।
जांच में सामने आया है कि 19 अगस्त की शाम मनोज ई-रिक्शा खड़ा कर चौहान ढाबे पर चाय पी रहा था। तभी सफेद कार से चारों आए, जमीन के कागज को लेकर उनमें बहस हो गई और देखते ही देखते वह लोग मनोज को पीटते हुए कार में ले गए। राहगीरों ने भी सब देखा था। बस यहीं से आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए।
सीसीटीवी से खुला अपहरण का राज
ई-रिक्शा चालक मनोज पाल के अपहरण कर हत्या के मामले में आरोपी भूल गए थे कि ढाबे के सीसीटीवी में सब दिख रहा है। मृतक की पत्नी ने जब तहरीर दी तो पुलिस ने ढाबे का सीसीटीवी फुटेज खंगाला, फिर यही फुटेज पुलिस को भाई के कातिलों तक ले गया। सीसीटीवी की मदद से ही पुलिस आरोपियों तक पहुंची और अपहरण कर हत्या करने में भाई और भतीजे समेत चारों आरोपियों को दबोच लिया।
ई-रिक्शा चालक मनोज पाल के अपहरण कर हत्या के मामले में आरोपी भूल गए थे कि ढाबे के सीसीटीवी में सब दिख रहा है। मृतक की पत्नी ने जब तहरीर दी तो पुलिस ने ढाबे का सीसीटीवी फुटेज खंगाला, फिर यही फुटेज पुलिस को भाई के कातिलों तक ले गया। सीसीटीवी की मदद से ही पुलिस आरोपियों तक पहुंची और अपहरण कर हत्या करने में भाई और भतीजे समेत चारों आरोपियों को दबोच लिया।
आरोपियों ने शव काे गहरे बांध में फेंक दिया था। आरोपियों के बयान के आधार पर अब गोताखोर बांध में शव टटोल रहे हैं। सगा भाई अनिल महोबा सदर कोतवाली गांधी नगर कचहरी के पीछे रहता है। इसमें उसका बेटा हिमांशु पाल और खन्ना थाना के सिरसी कलां निवासी रोहित साहू व राजू पाल भी शामिल हैं।