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UP: हरदोई में मनरेगा में गोलमाल! कुछ खरीदा न बेचा...कागजी फर्म को 82 लाख का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला

Thu, 03 Aug 2023 10:09 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 03 Aug 2023 10:09 AM IST
सार

Hardoi News: मामले में डीएम ने कहा कि फर्म का सत्यापन किए बिना भुगतान करना ही बड़ी लापरवाही है। पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएंगे। जो भी दोषी मिलेगा उस पर सख्त कार्रवाई जरूर की जाएगी। अनियमितताएं किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। 

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Breakup in MNREGA in Hardoi, Nothing was bought or sold, 82 lakhs was paid to the paper firm, read the whole m
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरदोई जिले में मनरेगा में अफसरों से लेकर कर्मचारी और प्रधान तक गजब के कारनामे कर रहे हैं। अफसरों ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में एक ऐसी फर्म को 82 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया, जिसने न तो कुछ खरीदा और न ही बेचा। और तो और काफी खोजने पर भी फर्म का कोई पता नहीं चला।

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सीधे शब्दों में कहें तो कागज पर बनी फर्म को सीमेंट, बजरी, रोड़ी आदि के नाम पर फसरों ने भुगतान कर दिया। मनरेगा के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों का भुगतान दो मदों में किया जाता है। श्रमांश का भुगतान जॉबकार्ड धारकों के खातों में किया जाता है, जबकि सामग्री अंश का भुगतान फर्मों को किया जाता है। 
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वित्तीय वर्ष 2022-23 में हरपालपुर विकास खंड की अलग-अलग ग्राम पंचायतों ने खाटू श्याम कांट्रेक्टर्स एंड सप्लायर्स को 82 लाख 70 हजार रुपये से अधिक का भुगतान मनरेगा के सामग्री अंश से किया। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब इस फर्म के अभिलेख खंगाले तो पता चला कि यह फर्म जीएसटी में पंजीकृत है।

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प्रोपराइटर महिला का कहीं नहीं है अता पता
इसकी प्रोपराइटर राधा नाम की महिला है। काफी खोजने पर भी हरपालपुर ब्लॉक मुख्यालय से लेकर हरदोई तक में इस महिला का कोई अता पता नहीं चला। जब इस बारे में और खोजबीन की गई, तो कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे। इनसे पता चला कि फर्म ने ऑनलाइन फीडिंग में अपना कारोबार शून्य बताया है।

मतलब यह कि फर्म ने न कुछ खरीदा और न ही कुछ बेचा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि मनरेगा के खाते से आखिर इस फर्म को 82 लाख रुपये से अधिक का भुगतान जिम्मेदारों ने किस आधार पर कर दिया।
बड़ा सवाल...जिम्मेदार कौन

  • फर्म को मनरेगा की वेंडर्स लिस्ट में किसने फीड कराया।
  • फीडिंग के समय फर्म का स्थलीय सत्यापन क्यों नहीं हुआ।
  • फर्म को कार्य देने का निर्णय किसका था।
  • भुगतान से पहले फर्म की कोई जानकारी क्यों नहीं जुटाई गई।

तो जीएसटी का भी है खेल
खाटू श्याम कांट्रैक्टर्स एंड सप्लायर्स फर्म को भुगतान से कई सवाल खड़े हो गए। मामला सिर्फ कागजी फर्म का ही नहीं बल्कि जीएसटी के खेल का भी है। इस फर्म को 82 लाख रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है। यह भुगतान सीमेंट, रोड़ी, बजरी जैसी सामग्रियों पर किया गया है। इन पर जीएसटी अलग-अलग है। एक औसत के मुताबिक लगभग 10 लाख रुपये की जीएसटी की देयता बनती है। इसका भी भुगतान कागजी फर्म को दिनाकर गोलमाल किया गया।

पता खोजा तो निकला कंप्यूटर ऑपरेटर का घर
संवाद न्यूज एजेंसी प्रतिनिधि ने फर्म के पते पर जाकर जानकारी जुटाई तो एक और खुलासा हुआ। फर्म का पता हाल ही में 30 मई 2023 को बदल दिया गया। इस फर्म का पता छह जनवरी 2023 को कृष्ण कुमार मिश्रा, नवीपुरवा हरदोई था। फर्म के बारे में कोई कुछ नहीं बता पाया, लेकिन इतना जरूर बताया कि यह मकान हरपालपुर ब्लॉक में तैनात एक कंप्यूटर ऑपरेटर का है। 30 मई को पता बदलकर 01, विश्वनाथ मंदिर कैनाल रोड प्रगतिनगर, हरदोई कर दिया गया। यहां पहुंचने पर भी फर्म के बारे में स्थानीय लोग कुछ नहीं बता पाए।

फर्म का सत्यापन किए बिना भुगतान करना ही बड़ी लापरवाही है। पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएंगे। जो भी दोषी मिलेगा उस पर सख्त कार्रवाई जरूर की जाएगी। अनियमितताएं किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।  -मंगला प्रसाद सिंह, डीएम

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