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Kanpur News: जीएसवीएम में ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी गठित
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कानपुर। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पहली ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज में गठित हुई है। यह कमेटी ब्रेन डेथ रोगियों के अंग दान के संबंध में निर्णय लेगी। प्राचार्य डाॅ. संजय काला ने बताया कि सोमवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने कमेटी का गठन करके इसे मंजूरी के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को भेजा है। इस कमेटी का गठन मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पीजीआई के गुर्दा रोग विभाग के किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर के मद्देनजर किया गया है। इसी साल से पीजीआई में गुर्दा प्रत्यारोपण शुरू होगा।
ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी की ए श्रेणी में कॉलेज के सभी विभागों के प्रोफेसरों को रखा गया है। बी श्रेणी में न्यूरो सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट रहेंगे। न्यूरो से जुड़े प्रोफेसर ही ब्रेन डेथ के संबंध में घोषणा करेंगे। इसके बाद रोगी और घायल के परिजनों की अनुमति के बाद अंगदान किया जाएगा। पीजीआई के नोडल और न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि इसके अलावा प्रदेश में केजीएमयू, एसजीपीजीआई आदि चिकित्सा संस्थानों में ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी बनी है।
उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू होगा तो अंग की जरूरत पड़ेगी। बहुत से रोगियों को दान में गुर्दा नहीं मिल पाता। कुछ रोगियों को ही परिजन या कोई और गुर्दा देने के लिए राजी होता है। ऐसे में ट्रॉमा या अन्य मर्जों के रोगी जिनकी ब्रेन डेथ हो जाती है लेकिन ब्लड प्रेशर बना रहता है। हृदय काम करता है। उनका अंग लेकर रोगी को प्रत्यारोपित किया जा सकता है। हैलट में ट्रॉमा के बहुत रोगी आते हैं। अंग दान से बहुत से रोगियों की जान बच सकती है।
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ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी की ए श्रेणी में कॉलेज के सभी विभागों के प्रोफेसरों को रखा गया है। बी श्रेणी में न्यूरो सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट रहेंगे। न्यूरो से जुड़े प्रोफेसर ही ब्रेन डेथ के संबंध में घोषणा करेंगे। इसके बाद रोगी और घायल के परिजनों की अनुमति के बाद अंगदान किया जाएगा। पीजीआई के नोडल और न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि इसके अलावा प्रदेश में केजीएमयू, एसजीपीजीआई आदि चिकित्सा संस्थानों में ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी बनी है।
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उन्होंने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू होगा तो अंग की जरूरत पड़ेगी। बहुत से रोगियों को दान में गुर्दा नहीं मिल पाता। कुछ रोगियों को ही परिजन या कोई और गुर्दा देने के लिए राजी होता है। ऐसे में ट्रॉमा या अन्य मर्जों के रोगी जिनकी ब्रेन डेथ हो जाती है लेकिन ब्लड प्रेशर बना रहता है। हृदय काम करता है। उनका अंग लेकर रोगी को प्रत्यारोपित किया जा सकता है। हैलट में ट्रॉमा के बहुत रोगी आते हैं। अंग दान से बहुत से रोगियों की जान बच सकती है।
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