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Kanpur News: पौधों के साथ मानव स्वास्थ्य भी बचाएंगे बाॅयो एजेंट
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कानपुर। बाॅयो एजेंट सब्जियों के पौधों और फलों को बचाने के साथ इनका सेवन करने वाले इंसानों की सेहत भी बचाएंगे। पौधों पर फंफूदीनाशक दवा का असर बना रहता है जब कोई सेवन करता है तो यह शरीर को रोगग्रस्त करता है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि ने ऐसे बाॅयो एजेंट का अध्ययन किया है जो पौधों के रोगों को दूर करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। यह सेहत के लिए मुफीद हैं। बाॅयो एजेंट में जमीन में मिलने वाला बैक्टीरिया सूडोमोनास और ट्राइकोडर्मा फफूंदी और उसकी प्रजातियां हैं।
सूडोमोनास पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया का भोजन कर लेता है। साथ ही ट्राइकोडर्मा और अन्य कवक उन फफूंदियों को खा डालते हैं जो पौधों की जड़ों और पत्तों को खाकर नष्ट करता है। इस तरह फफूंदीनाशक के छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ती। बाॅयो एजेंट प्राकृतिक उपचार होने की वजह से इनका कोई नुकसान नहीं होता।
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विवि के पादप रोग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि बाॅयो एजेंट से पौधों के भूमिजनित रोगों को रोका जा सकता है। बाॅयो एजेंट पाउडर होता है, इसका पौधों पर छिड़काव कर दिया जाता है। ट्राइकोडर्मा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। यह रसायनों का एक प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।
बाॅयो एजेंट फ्यूजेरियम, राइजोक्टोनिया, स्क्लेरोटियम आदि मृदा जनित रोगों से बचाते हैं। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि इन भूमिजनित रोगों से कुल खाद्यान्न का 15 से 20 फीसदी नुकसान होता है। बाॅयो एजेंट इन रोग जनकों को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित कर लेते हैं।
फफूंदीनाशकों का मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
सब्जियों, फलों आदि पर छिड़के गए फफूंदीनाशकों का असर मानव स्वास्थ्य पर भी आता है। इससे मिचली, उल्टी, पेट दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, बुखार, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, जलन हो सकता है। पहले से किसी दूसरी बीमारी ग्रसित व्यक्ति के लिवर, गुर्दों और हृदय को हानि हो सकती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नुकसान हो सकता है।
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चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि ने ऐसे बाॅयो एजेंट का अध्ययन किया है जो पौधों के रोगों को दूर करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। यह सेहत के लिए मुफीद हैं। बाॅयो एजेंट में जमीन में मिलने वाला बैक्टीरिया सूडोमोनास और ट्राइकोडर्मा फफूंदी और उसकी प्रजातियां हैं।
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सूडोमोनास पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया का भोजन कर लेता है। साथ ही ट्राइकोडर्मा और अन्य कवक उन फफूंदियों को खा डालते हैं जो पौधों की जड़ों और पत्तों को खाकर नष्ट करता है। इस तरह फफूंदीनाशक के छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ती। बाॅयो एजेंट प्राकृतिक उपचार होने की वजह से इनका कोई नुकसान नहीं होता।
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विवि के पादप रोग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि बाॅयो एजेंट से पौधों के भूमिजनित रोगों को रोका जा सकता है। बाॅयो एजेंट पाउडर होता है, इसका पौधों पर छिड़काव कर दिया जाता है। ट्राइकोडर्मा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है। पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। यह रसायनों का एक प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।
बाॅयो एजेंट फ्यूजेरियम, राइजोक्टोनिया, स्क्लेरोटियम आदि मृदा जनित रोगों से बचाते हैं। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि इन भूमिजनित रोगों से कुल खाद्यान्न का 15 से 20 फीसदी नुकसान होता है। बाॅयो एजेंट इन रोग जनकों को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित कर लेते हैं।
फफूंदीनाशकों का मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव
सब्जियों, फलों आदि पर छिड़के गए फफूंदीनाशकों का असर मानव स्वास्थ्य पर भी आता है। इससे मिचली, उल्टी, पेट दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना, बुखार, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, जलन हो सकता है। पहले से किसी दूसरी बीमारी ग्रसित व्यक्ति के लिवर, गुर्दों और हृदय को हानि हो सकती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नुकसान हो सकता है।