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बिकरू कांड: वकील के सवालों से कोर्ट में लड़खड़ा गई थी श्यामू की पत्नी, 'वर्दी' को दागदार करने की कोशिश की

Tue, 18 Jul 2023 07:39 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर देहात Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 18 Jul 2023 07:39 PM IST
सार

Bikeru case: कानपुर देहात के चौबेपुर क्षेत्र में तीन साल पहले हुए बिकरू कांड में दोषी श्यामू बाजपेयी की पत्नी को अदालत में पेश किया गया था। जिरह के दौरान सवाल किए तो वो उलझ गई।

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Bikeru case: Shyamu's wife was stunned by the questions of prosecution
श्यामू बाजपेयी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिकरू कांड के बाद असलहा बरामदगी के दौरान पुलिस पर जानलेवा हमले के मामले में दोषी श्यामू बाजपेयी की पत्नी संतोषी बाजपेयी को केस की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने बतौर गवाह अदालत में पेश किया था। संतोषी ने अपने बयानों में अदालत में कहा था कि पति को तीन जुलाई 2020 को पुलिस घर से पकड़ कर ले गई थी। अभियोजन पक्ष ने संतोषी से जिरह के दौरान सवाल किए तो वो उलझ गई। तब उसने बताया कि पति श्यामू को पुलिस ने मेरे सामने नहीं गिरफ्तार किया था।

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अदालत में बचाव पक्ष ने श्यामू बाजपेयी की पत्नी संतोषी देवी को बतौर गवाह अदालत में पेश किया था। तब उसने बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि पति को तीन जुलाई 2020 को पुलिस घर से पकड़ ले गई थी। पूछने पर पुलिस वालों ने बताया था कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। तीन दिनों तक पति की कोई जानकारी नहीं दी, तो ननद रश्मि ने छह जुलाई 2020 को मामले में सीएम व डीएम को फैक्स किया था।

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इस पर अभियोजन पक्ष ने संतोषी से श्यामू की गिरफ्तारी को लेकर एक के बाद एक सवाल पूछे, तो वो लड़खड़ा गई। अभियोजन की जिरह में उसने बताया कि श्यामू बाजपेयी को पुलिस ने मेरे सामने गिरफ्तार नहीं किया था। एक सवाल के जवाब में उसने बताया कि मैंने कोई शिकायत उच्च अधिकारियों को श्यामू मेरे सामने के घर से गिरफ्तारी होने के संबंध में नहीं की थी। न ही पिता व बहन ने कोई शिकायत की थी। संतोषी ने कहा कि आठ जुलाई 2020 को टेलीविजन से गिरफ्तारी की जानकारी हुई थी। इसकी पुष्टि सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा व शशिभूषण सिंह चौहान ने भी की।

बबूल के पेड़ की जड़ के पास से तमंचा निकाल पुलिस पर चलाई थी गोली
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत मिश्रा ने बताया कि बिकरू कांड में दर्ज एफआईआर में श्यामू का नाम तीसरे नंबर पर है। पुलिस ने सात जुलाई 2020 को श्यामू को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद पुलिस टीम आठ जुलाई को दो गाड़ियों से श्यामू को वारदात में प्रयुक्त तमंचा बरामद करने के लिए शिवली ले गई। शिवली मोड़ से चार किलोमीटर पहले जंगली बबूल के जंगल में उसे गाड़ी से उतारा गया। करीब 90 मीटर पैदल चलने के बाद आरोपी श्यामू ने बबूल के पेड़ की जड़ के पास से वारदात में प्रयुक्त तमंचा निकालते हुए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी थी। इस मामले में पुलिस की तरफ से आरोपी श्यामू के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया गया था।
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सजा में फोरेंसिक रिपोर्ट रही महत्वपूर्ण, श्यामू के दाएं हाथ में लगा मिला था नाइट्राइड
मामले में अभियोजन की तरफ से कानपुर में फोरेंसिक फील्ड यूनिट में तैनात डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने अदालत में पेश होकर अपने बयानों में कहा था कि 21 जुलाई 2020 को उनके कार्यालय में श्यामू बाजपेयी के हाथों का कॉटन स्वेब परीक्षण के लिए प्राप्त हुआ था। उसका माइक्रो केमिकल परीक्षण करने पर फायरिंग का अवशेष नाइट्राइड मौजूद मिला था। वहीं वेंसडीन परीक्षण में रक्त की मौजूदगी की पुष्टि हुई। इस पर ओबटी कार्ड परीक्षण व इलेक्ट्रो फोरेंसिक विधि से परीक्षण किया गया। इसमें भी मानव रक्त मौजूद मिला। डॉक्टर के बयानों के आधार पर अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि दोषी ने जान से मारने की नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग की थी।

इनकी गवाही बनी सजा का आधार
सजा पाए दोषी श्यामू के मामले में अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए थे। इनकी गवाही सजा का आधार बनी। मामले में वादी मुकदमा तत्कालीन थानाप्रभारी रमाकांत पचौरी, निरीक्षक शेष नारायण पांडेय, हेड कांस्टेबल सत्यवीर सिंह, दरोगा संतोष कुमार, अजहर इशरत, फोरेंसिक फील्ड यूनिट के डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, कांस्टेबल राहुल सिंह व इंस्पेक्टर केएन राय ने गवाही दी।

बचाव पक्ष करेगा अपील
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सीपी शुक्ला ने कहा कि अदालत ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व श्यामू को सात जुलाई 2020 को पुलिस की तरफ से गोली मारने के संबंध में पेश किए गए साक्ष्यों पर गौर नहीं किया गया है। अदालत की ओर से दी गई सजा के खिलाफ वह हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

यह था मामला
दो जुलाई 2020 को चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस पार्टी पर कुख्यात विकास दुबे ने साथियों के साथ मिलकर फायरिंग कर दी थी। घटना में तत्कालीन सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। कई घायल हो गए थे। बदमाशों ने पुलिस कर्मियों के असलहे लूट लिए थे। घटना के बाद पुलिस व एसटीएफ ने विकास दुबे समेत छह बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया था। वहीं श्यामू बाजपेयी समेत कई बदमाशों को गिरफ्तार किया था। घटना में पुलिस से लूटे गए व वारदात में प्रयुक्त असलहों की बरामदगी के लिए पुलिस श्यामू बाजपेयी को उसके बताए गए स्थान पर लेकर गई थी। जहां उसने पेड़ के नीचे से असलहा निकालकर पुलिस टीम पर फायर कर दिया था।
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