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जब ब्रह्मचारी पूरनमल पर फिदा हुई पिता की दूसरी पत्नी, उसके बाद 'गुरु ने किया कमाल'

Wed, 25 Jul 2018 08:57 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 25 Jul 2018 08:57 AM IST
सार

- मर्चेंट चैंबर हॉल में हुआ ‘भक्त पूरनमल’ की नौटंकी का मंचन
- नौटंकी मास्टर रम्पत ने अपनी टीम के साथ किया मंचन
 

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Bhakt Pooranlal and his step mother nautanki in kanpur
मर्चेंट चैंबर हॉल में हुआ ‘भक्त पूरनमल’ की नौटंकी का मंचन

विस्तार

आज नौटंकी को जीवनदान की आवश्यकता है। यह विलुप्त होने की कगार पर है। इसे बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि शादी-समारोह या किसी और आयोजन में नौटंकी कराना पहले शान की बात होती थी। नक्कारे की आवाज ही भीड़ जुटाने के लिए काफी होती थी, लेकिन अब वो दिन नहीं रहे। यह कहना है मशहूर नौटंकी कलाकार मास्टर रम्पत का। उन्होंने बताया कि कानपुर की नौटंकी केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं पूरे भारत में मशहूर थी। ब्रिटिश जमाने में मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन नौटंकी ही था। 50 और 60 के दशक में नौटंकी के गीत फिल्मों में भी सुनाई देते थे। हिंदी सिनेमा की हिट फिल्म ‘तीसरी कसम’ (1966) में अभिनेत्री वहीदा रहमान हीराबाई का रोल कर रही थीं, जो कानपुर की रहने वाली दिखाई गईं। फिल्म में हीराभाई का चरित्र नौटंकी कलाकार के जीवन से प्रेरित बताया गया था। 
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कानपुर के सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में ‘भक्त पूरनमल’ नौटंकी का मंचन हुआ। नौटंकी के माध्यम से बताया गया कि कैसे बाल ब्रह्मचारी पूरनमल पर उनके पिता की दूसरी पत्नी का दिल आ जाता है। नौटंकी का मंचन रम्पत ने अपनी टीम के साथ किया। नौटंकी का आयोजन स्व. पंडित सिद्धेश्वर अवस्थी, स्व. कृष्णा भाई और उस्ताद राशिद खां वारसी की स्मृति में संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली की ओर से किया गया। इसका मंचन रम्पत रानी बाला नौटंकी डेवलपमेंट सोशल वेलफेयर सोसाइटी ने किया।

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नौटंकी की कहानी कुछ इस प्रकार है

Bhakt Pooranlal and his step mother nautanki in kanpur
नौटंकी मास्टर रम्पत ने अपनी टीम के साथ किया मंचन
भक्त पूरनमल बाल ब्रह्मचारी होते हैं। उनके वृद्ध पिता राजा संघपति नई रानी की खोज में एक स्वयंवर में पहुंच जाते हैं। स्वयंवर में उन्हें मछली की आंख में निशाना लगाने की चुनौती दी जाती है। संघपति जीत जाते हैं और उनका विवाह फुलंधे नाम की कम उम्र की राजकुमारी से हो जाती है। राजा संघपति जब अपनी दूसरी पत्नी फुलंधे को लेकर महल पहुंचते हैं तो पहली पत्नी रानी अंबाधे नाराज होती हैं। वहीं कम उम्र की फुलंधे को बुजुर्ग पति कतई पसंद नहीं आते। फुलंधे का दिल राजा के बेटे पूरनमल पर आ जाता है। वह उसे पाने की हर संभव कोशिश करती है। पूरनमल अपने ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा नहीं तोड़ते। इससे नाराज होकर फुलंधे एक नाटक रचकर पूरनमल को फांसी की सजा दिलवा देती है। पूरनमल के गुरु गोरखनाथ अपने मंत्रों द्वारा उन्हें जीवित कर देते हैं...। इसके बाद पर्दा गिर जाता है और नौटंकी समाप्त। मास्टर रम्पत ने बताया कि यह कहानी पंजाब के सियालकोट की असली कहानी है। कई सालों पहले वहां ऐसा हुआ था। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. इंद्रमोहन रोहतगी और विशेष अतिथि पार्षद अशोक पाल मौजूद रहे।
 

इन्होंने किया नौटंकी का मंचन

Bhakt Pooranlal and his step mother nautanki in kanpur
भक्त पूरनमल बाल ब्रह्मचारी होते हैं
नौटंकी में प्रमुख कलाकार के रूप में डॉ. राम शंकर, मोहम्मद शाहिद, डॉ. राधेश्याम गर्ग, मास्टर रम्पत, सुरेंद्र शर्मा, सुरेश मलिक, आकाश सोनकर, साजन, रनवीर यादव, विरल, शिवम केसरवानी, लक्कड़ नाथ फक्कड़नाथ, तड़कनाथ सुरैय्या, निहारिका उर्फ कशिश, रानी बाला, देवांशी, रश्मि रहीं। संगीत राज कुमार ने दिया और नौटंकी का निर्देशन मोहम्मद शाहिद ने किया। 
 
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