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रेल बाजार में एस-10 के संरक्षण में सट्टा और जुआ, नया ठिकाना खोज रहे सटोरिये
Thu, 18 Apr 2019 11:14 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 18 Apr 2019 11:14 AM IST
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डेमो
कानपुर रेल बाजार में एस-10 के संरक्षण में धड़ल्ले से सट्टा और जुआ चल रहा है। पुलिस जब भी किसी को पकड़ती है तो इनके सदस्य पैरवी के लिए पहुंच जाते हैं। रेल बाजार पुलिस ने इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर एसएसपी को भेजी है।
आठ अप्रैल को रेल बाजार पुलिस ने आरपीएफ कॉलोनी स्थित बाबा ढाबे के पास चार सटोरियों को पकड़ा था। इसमें रिटायर दरोगा का बेटा अरुण सोनी, नफीस, आयुष शुक्ला और समीर थे। कुछ ही देर बाद करीब आधा दर्जन लोग थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस से सटोरियों को छोड़ने की पैरवी की थी। इंस्पेक्टर डीबी तिवारी ने बताया कि जब पता किया गया तौ पैरवी करने वालों में लगभग सभी एस-10 के सदस्य थे। हालांकि, सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
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आठ अप्रैल को रेल बाजार पुलिस ने आरपीएफ कॉलोनी स्थित बाबा ढाबे के पास चार सटोरियों को पकड़ा था। इसमें रिटायर दरोगा का बेटा अरुण सोनी, नफीस, आयुष शुक्ला और समीर थे। कुछ ही देर बाद करीब आधा दर्जन लोग थाने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस से सटोरियों को छोड़ने की पैरवी की थी। इंस्पेक्टर डीबी तिवारी ने बताया कि जब पता किया गया तौ पैरवी करने वालों में लगभग सभी एस-10 के सदस्य थे। हालांकि, सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
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पुलिस से बचाने की जिम्मेदारी
पुलिस के मुताबिक, एस-10 से जुड़े सदस्यों ने सटोरियों के साथ साठगांठ कर रखी है। यह उन्हें सुरक्षित जगह मुहैया करवाने और पकड़े जाने पर छुड़वाने का ठेका लेते हैं। शहर में अलग-अलग थानों में भी ऐसे ही जुआरी, सटोरिये छुड़ाए जाते हैं। स्थानीय थानों के कई पुलिसकर्मी भी इसमें संलिप्त होते हैं।
एडीजी तक पहुंची थी शिकायतें
करीब डेढ़ महीने पहले एडीजी को शिकायतें पहुंची थी कि एस-10 में कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी जुड़े हैं। एडीजी ने एसएसपी को निर्देश दिए थे कि जांच कर ऐसे लोगों को तुरंत एस-10 से बाहर करें। इसके बावजूद ये अभी भी शामिल हैं।
नौबस्ता और बर्रा में पकड़े गए सटोरिये अब नया ठिकाना खोज रहे हैं। मंगलवार को ही सरगना जितेंद्र शिवहरे, हिमांशु, मोहित, सुमित व आशीष को जमानत मिली थी। एलआईयू की टीम इन पर नजर रखे हैं। चूंकि पहले कानपुर व वाराणसी से पूरा रैकेट संचालित कर रहे थे, जिसका पर्दाफाश लखनऊ एसटीएफ ने किया था, इसलिए अब वह किसी नए शहर को ठिकाना बनाने की तलाश में हैं।
एडीजी तक पहुंची थी शिकायतें
करीब डेढ़ महीने पहले एडीजी को शिकायतें पहुंची थी कि एस-10 में कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी जुड़े हैं। एडीजी ने एसएसपी को निर्देश दिए थे कि जांच कर ऐसे लोगों को तुरंत एस-10 से बाहर करें। इसके बावजूद ये अभी भी शामिल हैं।
नौबस्ता और बर्रा में पकड़े गए सटोरिये अब नया ठिकाना खोज रहे हैं। मंगलवार को ही सरगना जितेंद्र शिवहरे, हिमांशु, मोहित, सुमित व आशीष को जमानत मिली थी। एलआईयू की टीम इन पर नजर रखे हैं। चूंकि पहले कानपुर व वाराणसी से पूरा रैकेट संचालित कर रहे थे, जिसका पर्दाफाश लखनऊ एसटीएफ ने किया था, इसलिए अब वह किसी नए शहर को ठिकाना बनाने की तलाश में हैं।