यूपी के उन्नाव जिले में जेई (जापानी इंसेफ्लाइटिस) का मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। नवाबगंज क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी में जेई की पुष्टि के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की संक्रामक रोग विभाग की टीम पीड़ित के गांव पहुंची।
संक्रामक रोग विभाग की टीम ने परिजनों से अब तक हुए इलाज के बारे में जानकारी ली। परिजनों ने बताया कि मार्च में लखनऊ के केजीएमयू में इलाज के दौरान जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि हुई थी। किशोरी की दोनों आंखों की रोशनी भी चली गई। सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि जेई का मरीज मिलने की सूचना शासन से मिली थी। वेरीफिकेशन कराने के निर्देश संक्रामक रोग विभाग को दिए थे। मरीज का उपचार कानपुर व लखनऊ में हुआ है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
नवाबगंज के धर्मशाला में एक 15 वर्षीय किशोरी के जेई से पीड़ित होने की सूचना शनिवार सुबह स्वास्थ्य विभाग को मिली थी। सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने संक्रामक रोग विभाग के नोडल अधिकारी डा. आरएस मिश्रा, डा. रवि यादव को नवाबगंज भेजा। टीम ने किशोरी रितू उपाध्याय (15) के घर पहुंच मामले की जानकारी ली। मां सुनीता ने बताया कि रितू कानपुर के कैलाशनाथ इंटर कालेज में कक्षा आठ की छात्रा थी। फरवरी 2018 में उसे बुखार आया था। उन्होंने पहले कानपुर में इलाज कराया। लाभ न मिलने पर 22 मार्च को लखनऊ केजीएमयू में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने जेई की पुष्टि की। इलाज के बाद चिकित्सकों ने उसे घर भेज दिया था। 1 अप्रैल से वह नवाबगंज में नानी के घर में रह रही है।
अप्रैल माह में चला था टीकाकरण अभियान
पूर्वांचल में कहर बरपाने वाले जापानी इंसेफ्लाइटिस की रोकथाम के लिए शासन ने व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। जिले में नवंबर 2017 व 2 अप्रैल से 20 अप्रैल 2018 तक जेई टीकाकरण अभियान चलाया गया था। अभियान में 95 हजार बच्चों को प्रतिरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि अभियान में सिर्फ 89 हजार बच्चों को ही टीके लग सके थे।
मजदूरी कर परिवार का खर्च चला रही है सुनीता
रितू परिजनों के साथ कानपुर में रहती थी। पिता की मौत के बाद वह मां सुनीता व अन्य भाई बहनों के साथ नवाबगंज में नानी के घर आकर रहने लगी थी। पति की मौत के बाद परिवार का खर्च चलाने के लिए सुनीता मजदूरी करने लगी।