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Bangladeshi Citizen Case: डॉ. रिजवान के बच्चों के अंकपत्र और टीसी फर्जी, बंटवारे के समय बैरकपुर में था परिवार

Sun, 25 Dec 2022 10:30 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 25 Dec 2022 10:30 AM IST
सार

डॉ.रिजवान को पुलिस कोलकाता ले गई थी, जहां उसे जानने वाले तीन लोग मिले। उन्होंने बताया कि बंटवारे से पहले कोलकाता से 30 किमी दूर बैरकपुर में डॉ. रिजवान का परिवार रहता था। वहीं, उसका वह दोस्त नहीं मिला, जिसके बारे में उसने बताया था कि नींद की गोलियां उसके घर में रखी हैं।

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Bangladeshi Citizen Case, Marksheets and TCs of Dr. Rizwans children turned out to be fake
bangladeshi citizen case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पुलिस कस्टडी में लिए गए बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान को पुलिस कोलकाता ले गई है। जिस स्कूल में उसने अपने बच्चों का दाखिला बताया था वह भी फर्जी निकला। उसने बच्चों के अंक पत्र और टीसी कोलकाता से फर्जी बनवाई थी।

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स्कूलों की ओर से लिखित रूप में दे दिया गया है कि डॉ. रिजवान के बच्चे कभी उनके यहां नहीं पढ़े। रविवार शाम पांच बजे उसकी रिमांड खत्म हो जाएगी। शुक्रवार आधी रात इंस्पेक्टर सूर्यबली पांडेय के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम कोलकाता पहुंची थी।
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शनिवार को पुलिस डॉ. रिजवान को हावड़ा ले गई, जहां डॉ. रिजवान ने परिवार संग रहने का दावा किया था। आसपास के लोगों से जब पुलिस ने पूछताछ की तो सभी ने उसे पहचाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस उसे कोलकाता से 30 किमी दूर बैरकपुर ले गई।

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यहां उसे जानने वाले तीन लोग मिले। उन्होंने बताया कि बंटवारे के समय बैरकपुर में डॉ. रिजवान परिवार रहता था फिर बांग्लादेश चला गया था। इस दौरान उसका वह दोस्त नहीं मिला, जिसके बारे में उसने बताया था कि नींद की गोलियां उसके घर में रखी हैं।

बता दें कि मूलरूप से बांग्लादेश के कुरला निवासी डॉ. रिजवान मोहम्मद, उसकी पत्नी हिना, ससुर खालिद, बेटी रुखसार, एक नाबालिग बेटे (17) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यह लोग वर्ष 2016 से यहां छिपकर रह रहे थे। जासूसी मामले में भी इनकी जांच की जा रही है।

डॉ. रिजवान मोहम्मद और उसके परिवार ने सपा विधायक इरफान सोलंकी और एक पार्षद द्वारा दिए प्रमाण पत्र के आधार पर आधार कार्ड बनवाया था। ऐसे में विधायक इरफान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जांच के बाद इस मामले में भी पुलिस उन्हें आरोपी बना सकती है।

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