Banda Death Sentence: बाबा और मां बोले- जैसे बिटिया को मारा, वैसे ही दरिंदे को मरते देखना है
मरका थाना क्षेत्र में पांच साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या के दोषी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही परिजनों में खुशी की लहर है। मृतका बच्ची के बाबा और मां ने कहा है कि उन्हें फांसी की घड़ी का इंतजार है।
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जिस तरह से बिटिया को गले में फंदा कसकर मारा था। उसी तरह दरिंदे रामबहादुर को भी मरते हुए देखना है। उस घड़ी का बेसब्री से इंतजार है। मामले में अदालत क निर्णय सुनने के बाद ऐसा ही कुछ बोल रहे हैं पांच वर्षीय मासूम मृतका के बाबा और मां...।
बांदा जिले के मरका थाना क्षेत्र के एक गांव में बालिका के साथ रिश्ते के बाबा ने दुष्कर्म किया। इसके बाद में अपनी ही लुंगी (तहमत) से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। इस जघन्य अपराध पर पुलिस ने भी गंभीरता दिखाई और कम समय में ही तफ्तीश व साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
पॉक्सो अदालत में केस चला। दोष सिद्ध होने पर विशेष न्यायाधीश ने 45 वर्षीय आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुना दी। अदालत से यह फैसला आने के बाद दरिंदगी का शिकार हुई बालिका के परिजन बेहद खुश हैं। परिजनों का कहना है कि रिश्तों को कलंकित करने और मासूम के साथ बर्बरता बरतने वाले के साथ बुरा हश्र ही होना चाहिए।
अदालत से फैसला आने के बाद घर लौटे मासूम के बाबा और घर पर मौजूद मां ने कहा कि जिस तकलीफ से मेरी बिटिया गुजरी, उससे कहीं ज्यादा दर्द दरिंदे को मिलना चाहिए। उम्मीद है कि ऊंची अदालतें भी इस फैसले को बरकरार रखेंगी।
अब सिर्फ एक ही इच्छा है- दरिंदे को फांसी के फंदे पर लटकता देखना। दर्दनाक मौत देने वाले को फांसी की सजा ही मिलना चाहिए थी। अदालत ने यह फैसला सुनाकर बिटिया के साथ न्याय किया है। उनका कानून पर विश्वास बढ़ गया है। पुलिस की मदद भी सराहनीय रही।
गांव में गर्माई रही फांसी की सजा
अदालत से रामबहादुर को फांसी की सजा सुनाने के बाद गांव में चर्चा का विषय रहा। हर तरफ फैसले को लेकर चकचक रही। गांव की दुकानों से लेकर घरों और खेतों में भी लोग घटना से संबंधित बातों में मशगूल दिखे।
ग्रामीणों का कहना था कि ऐसा जघन्य अपराध पहले कभी उनके गांव में नहीं हुआ। इस घृणित अपराध के लिए जो सजा दी गई है वह बिल्कुल सही है। जज के फैसले को सुनकर ऐसे कुकृत्य करने से पहले लोग डरेंगे। इस घिनौने अपराध के लिए फांसी की सजा ही होनी चाहिए थी।