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Auraiya: बोगस फर्मों से 8.62 करोड़ की कर चोरी करने वाले चार शातिर गिरफ्तार

Fri, 24 Apr 2026 09:06 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: Shikha Pandey Updated Fri, 24 Apr 2026 09:06 PM IST
सार

चारों आरोपी मेरठ के रहने वाले हैं। एक चार्टर्ड एकाउंटेंट भी शामिल है। शक होने पर राज्य कर अधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 

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Auraiya: Four Cunning Individuals Arrested for Evading Taxes Worth ₹8.62 Crore Through Bogus Firms
गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएसटी चोरी के एक बड़े गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम व कोतवाली पुलिस ने बोगस फर्मों से 8.62 करोड़ की कर चोरी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मेरठ के निवासी इन आरोपियों में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी शामिल है। ये अपराधी फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट पास ऑन करने का खेल रहे थे। पूछताछ के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से चारों को इटावा जेल भेज दिया गया।
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एसपी अभिषेक भारती ने बताया कि मामले की शुरुआत 23 फरवरी 2026 को हुई। तब राज्य कर अधिकारी औरैया विजय शंकर दीक्षित ने मून इंटरप्राइजेज, खानपुर के खिलाफ जीएसटी चोरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच में पाया गया कि यह फर्म सिर्फ कागजों पर थी और घोषित पते पर अस्तित्व में नहीं मिली। पुलिस जांच में जब कड़ियां जोड़ीं तो वह आरोपियों तक पहुंच गई।
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पुलिस ने मेरठ के थाना नौचंदी के मोहल्ला शास्त्री नगर निवासी मोहम्मद अतहर, थाना लिसाड़ी गेट तारापुरी रोड निवासी सीए शाह आलम, थाना सिविल लाइंस के मोहनपुरी निवासी विशाल और थाना किठौर के गांव महलवाला निवासी मोहम्मद इमरान को गिरफ्तार किया। गिरोह ने मून इंटरप्राइजेज और चमन ट्रेडर्स हापुड़ के नाम की बोगस कंपनियां बनाकर करोड़ों के फर्जी बिल दिखाए थे। इसमें मून इंटरप्राइजेज के माध्यम से कुल 2.87 करोड़ रुपये की टैक्सेबल वैल्यू के फर्जी बिल काटे गए। वहीं चमन ट्रेडर्स के माध्यम से 5.75 करोड़ की टैक्सेबल वैल्यू के फर्जी बिलों का लेनदेन पाया गया।

एसपी ने बताया कि मोहम्मद अतहर गिरोह का मुख्य संचालक, जिसने मून इंटरप्राइजेज का एक्सेस खरीदकर खेल शुरू किया। शाह आलम व उसका सहायक विशाल अकाउंटेंसी का पूरा काम देखते थे और फर्जी बिल तैयार करते थे। इमरान फर्जी दस्तावेज जुटाकर नई बोगस फर्में तैयार करवाता था। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बिना किसी वास्तविक माल की सप्लाई के केवल कागजों पर लेनदेन दिखाकर अवैध आर्थिक लाभ कमा रहे थे। एसआईटी अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह तार किन शहरों से जुड़े हैं।


बिना माल क्रय-विक्रय के डकार रहे थे टैक्स का पैसा
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे केवल कागजों पर माल की खरीद-बिक्री दिखाकर सरकार से आईटीसी क्लेम करते थे। असल में धरातल पर किसी भी माल का लेन-देन नहीं होता था। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और इन फर्जी फर्मों से लाभ उठाने वाले अन्य व्यापारियों की तलाश में जुट गई है।

ये हुआ बरामद
कोतवाल राजकुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों पास से तीन लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, तीन डोंगल, एक हार्ड डिस्क, दो पेनड्राइव, 16 डीएससी डिवाइस (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट), दो स्मार्ट एआई राउटर के अलावा 60330 रुपये व छह टैक्स इनवॉइस बिल की प्रतियां और अन्य फर्जी कागजात बरामद हुए हैं।
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