Kanpur: रोहिंग्याओं को पनाह देने वालों की तलाश में जुटी एटीएस, बांग्लादेश से आने के बाद कानपुर में रुके दो दिन
एटीएस के रडार पर शहर के आधा दर्जन लोग हैं, जिनकी रोहिंग्या नागरिकों को शहर में ठिकाना मुहैया कराने में अहम भूमिका थी।
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कानपुर के रास्ते जम्मू-कश्मीर जाने से पहले रविवार को झकरकटी बस अड्डे से पकड़े गए म्यांमार के रोहिंग्या नागरिक दो दिन तक कानपुर में रुके थे। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारी के बाद अब एटीएस अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए इन विदेशी नागरिकों को पनाह देने वालों की तलाश में जुट गई है।
सूत्रों का कहना है कि एटीएस के रडार पर शहर के आधा दर्जन लोग हैं, जिनकी रोहिंग्या नागरिकों को शहर में ठिकाना मुहैया कराने में अहम भूमिका थी। जांच एजेंसी उन्हें चिह्नित कर साक्ष्य जुटा रही है। साथ ही उन ठिकानों की भी पुष्टि करने में जुटी है, जहां रोहिंग्या नागरिक खुद के रुकने की बात बता रहे हैं। चूंकि पकड़े गए नागरिकों को उन ठिकानों की सही लोकेशन नहीं पता है, ऐसे में एटीएस अब उन इलाकों की मुखबिर तंत्र के जरिये पड़ताल में जुटी है। माना जा रहा है कि मामले में जल्द ही गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
रोहिंग्या बहाना, मददगारों का नेटवर्क निशाना
जांच एजेंसी के निशाने पर रोहिंग्या नागरिकों से ज्यादा वह रूट और वह लोग हैं जिनकी बदौलत अवैध रूप से लोग देश में घुसपैठ कर रहे हैं। यही वजह है कि इस मामले में केंद्र की कई एजेंसियों के अधिकारी भी जुट गए हैं। आईबी और एनआईए भी उस रास्ते और नेटवर्क की परतें उधेड़ने में जुट गई है जो इन लोगों को बांग्लादेश से त्रिपुरा के रास्ते कानपुर तक लाया और यहां से कश्मीर ले जाने वाला था। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बात का खतरा ज्यादा है कि इसी रूट और नेटवर्क का सहारा लेकर आतंकी देश में घुस सकते हैं।
स्लीपर सेल का काम कर सकते हैं अवैध नागरिक
कहने को रोहिंग्या नागरिक अपने देश में सताए गए हैं। बचने के लिए पैसा खर्च कर अवैध रूप से भारत में पनाह लेने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन जांच एजेंसियों को इस बात का खतरा ज्यादा सता रहा है कि ये सभी स्लीपर सेल का काम न करने लगें। जो नेटवर्क उन्हें मदद कर रहा है, वह कभी भी उनसे कोई आतंकी वारदात करा दे तो सरकारी मशीनरी के पास ऐसे अवैध लोगों का ब्योरा ही नहीं होगा। यही वजह है कि हर अवैध नागरिक को चिह्नित कर पकड़ने की कोशिश की जा रही है।