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जानिए अटल की जिंदगी में क्या महत्व रखती थी 'कार्ल मार्क्स और सत्यार्थ' की विचारधारा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 17 Aug 2018 12:43 AM IST
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी आज हमारे बीच तो नहीं हैं लेकिन उनके भाषणों के बोल और कविताएं लोगों के बीच कभी खत्म नहीं होंगी। अटल हर युवाओं के बीच अपनी कविताओं की वजह से काफी लोकप्रिय लोकप्रिय हुए थे। अटल की जिंदगी का एक बड़ा समय कानपुर में बीता।
अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
कुछ ही लोगों को यह पता होगा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने बतौर कम्युनिस्ट कदम रखा था। पढ़ाई-लिखाई के दौर में छात्र आंदोलनों में अटल बिहारी वाजपेयी के हाथों में लाल परचम लहराता था। जिस शहर के छात्रावास में अटल रहते थे, उस शहर यानी मजदूरों और मिलों के शहर कानपुर का माहौल भी कम्युनिस्ट था।
अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
अटल पर मार्क्सवाद की छाप पड़ चुकी थी। इसी दौर में कार्ल मार्क्स और सत्यार्थ को पढ़ा तो महसूस हुआ कि दोनों के विचारों में खास अंतर नहीं है। राह बदली और अटल बिहारी वाजपेयी अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सानिध्य में थे।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए करने के बाद उन्होंने एलएलबी में प्रवेश लिया। इसके बाद उन्होंने कानपुर में ही एलएलबी की पढ़ी पूरी की। यह संयोग रहा कि उनके पिता भी उनके साथ ही एलएलबी के छात्र रहे। राजनीति में उनके सक्रिय होने के संकेत यहीं से दिखने लगे थे। पढाई के दौरान छात्र आंदोलनों में उनकी हमेशा सक्रिय और अग्रणी भूमिका रही। पढाई और आंदोलनों के दौरान ही वे आरएसएस से प्रभावित हुए और सक्रिय रूप से संघ के कार्यों में जुट गए।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीर
यह संयोग ही रहा कि संघ की विचारधारा के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक अटल बिहारी बाजपेई ने शुरूआती दौर में कम्युनिस्ट पार्टी के साथी कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। कानपुर में छात्र जीवन के दौरान उन्होंने लाल परचम के साए में कई आंदोलनों ने हिस्सा लिया।