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यूपी: अदना सा सिपाही और हैसियत 35 करोड़ की, हर रास्ते से की कमाई, अब हुई ये कार्रवाई
Tue, 13 Jul 2021 12:01 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 13 Jul 2021 12:01 AM IST
सार
शिवेंद्र मूल रूप से औरैया के भरतौल गांव का निवासी है। वर्तमान में उसकी तैनाती एसटीएफ के लखनऊ मुख्यालय में है। कानपुर में तैनाती के दौरान उस पर आय से अधिक संपत्ति बनाने, भूमाफिया से सांठगांठ और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगे थे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कानपुर में जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने सोमवार को एसटीएफ के सिपाही चकेरी गांधीग्राम निवासी शिवेंद्र सिंह सेंगर का शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया। सिपाही को कारण बताओ नोटिस जारी कर 14 जुलाई को न्यायालय में तलब किया है कि क्यों न उसका शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया जाए।
शिवेंद्र मूल रूप से औरैया के भरतौल गांव का निवासी है। वर्तमान में उसकी तैनाती एसटीएफ के लखनऊ मुख्यालय में है। कानपुर में तैनाती के दौरान उस पर आय से अधिक संपत्ति बनाने, भूमाफिया से सांठगांठ और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगे थे।
एंटी करप्शन विंग की जांच में सभी आरोप सही पाए गए। इस पर एंटी करप्शन के अधिकारियों ने उसके खिलाफ चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में उसके पास 35 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की पुष्टि हुई थी। वह विभाग को हिसाब नहीं दे सका था कि वेतन के अलावा उसके पास आय का क्या साधन है।
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इसी आधार पर माना गया कि भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं। बताते हैं कि लाइसेंसी रिवॉल्वर के बल पर वह लोगों को धमकाया करता था। थाने में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया है। 14 जुलाई को वह जिलाधिकारी की कोर्ट में पेश नहीं होता तो लाइसेंस निरस्त भी किया जा सकता है।
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शिवेंद्र मूल रूप से औरैया के भरतौल गांव का निवासी है। वर्तमान में उसकी तैनाती एसटीएफ के लखनऊ मुख्यालय में है। कानपुर में तैनाती के दौरान उस पर आय से अधिक संपत्ति बनाने, भूमाफिया से सांठगांठ और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगे थे।
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एंटी करप्शन विंग की जांच में सभी आरोप सही पाए गए। इस पर एंटी करप्शन के अधिकारियों ने उसके खिलाफ चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में उसके पास 35 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की पुष्टि हुई थी। वह विभाग को हिसाब नहीं दे सका था कि वेतन के अलावा उसके पास आय का क्या साधन है।
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इसी आधार पर माना गया कि भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं। बताते हैं कि लाइसेंसी रिवॉल्वर के बल पर वह लोगों को धमकाया करता था। थाने में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया है। 14 जुलाई को वह जिलाधिकारी की कोर्ट में पेश नहीं होता तो लाइसेंस निरस्त भी किया जा सकता है।