एचबीटीयू में एक और फर्जीवाड़ा: तीन बार रिजेक्ट अभ्यर्थी, चौथी बार हो गया पास
नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर कई लोगों ने आरटीआई देकर जवाब मांगा है पर अभी तक कुलपति ने कोई जवाब नहीं दिया है जबकि तय समय सीमा खत्म हो चुकी है।
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हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया में एक और गड़बड़ी सामने आई है। मैकेनिकल विभाग के एक अभ्यर्थी को अकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स (एपीआई) के आधार पर तीन बार रिजेक्ट किया गया। फिर परीक्षा की तिथि से दो दिन पहले दोबारा एपीआई के आधार पर सूची जारी कर अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के लिए चयनित कर लिया गया।
एचबीटीयू की पूरी भर्ती प्रक्रिया शुरुआत से ही संदेह के घेरे में है। रिजेक्ट हुए अभ्यर्थियों ने कंप्यूटर साइंस, बॉयो केमिकल और गणित विभाग में हुईं नियुक्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। मामले की जांच चल रही है। इस बार मामला मैकेनिकल विभाग का है। रिजेक्ट अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार के लिए चुने गए अभ्यर्थी को 16 फरवरी को जारी पहली सूची में रिजेक्ट किया गया था।
इसका कारण बताया गया था कि अभ्यर्थी ने एमटेक उस ब्रांच से नहीं किया है जो नियुक्ति के मानक के आधार पर तय है। 26 फरवरी और पांच मार्च को जारी सूची में यही कारण बताते हुए उसे रिजेक्ट किया गया था। इसके बाद लिखित परीक्षा 13 मार्च को होनी थी। परीक्षा से दो दिन पहले जारी सूची में अभ्यर्थी को अर्ह मान लिया गया।
मामले की शिकायत प्राविधिक शिक्षा मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक की गई है, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है। बता दें कि एपीआई में विभिन्न बिंदुओं पर नंबर दिए जाते हैं। इसके अंक और लिखित परीक्षा के अंक जोड़कर कुल नंबर दिए जाते हैं।
उसके आधार पर साक्षात्कार में चयन होता है। कुलपति प्रो. समशेर ने बताया कि एपीआई में नंबर कम आने पर अभ्यर्थी को कमेटी के सामने पक्ष रखने का मौका मिलता है। कमेटी उनके बिंदुओं पर विचार करने के बाद एपीआई सूची में बदलाव कर सकती है।
नहीं मिल रहा आरटीआई का जवाब
नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर कई लोगों ने आरटीआई देकर जवाब मांगा है पर अभी तक कुलपति ने कोई जवाब नहीं दिया है जबकि तय समय सीमा खत्म हो चुकी है।