Kanpur: सपा विधायक इरफान सोलंकी की पत्नी का आरोप, जेल में हो रहा मेरे पति का उत्पीड़न, नहीं मिल रहा इलाज तक
वकील गौरव दीक्षित ने बताया कि इरफान पर फर्जी आधार कार्ड लगाकर हवाई यात्रा करने का आरोप है। आधार कार्ड अशरफ अली का बताया गया। इस पर इरफान सोलंकी ने कानपुर जेल से सात दिसंबर को इरफान ने कोतवाली के एसएचओ को चिट्ठी लिखी थी।
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सपा विधायक इरफान सोलंकी का महाराजगंज जेल में उत्पीड़न हो रहा है और उन्हें डॉक्टरों की सलाह के बाद भी इलाज नहीं कराया जा रहा है। यह आरोप उनकी पत्नी नसीम सोलंकी और वकील गौरव दीक्षित ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में हुई वार्ता में लगाया। शीतलहर के बीच विधायक को गद्दा और रजाई तक जेल प्रशासन नहीं दे रहा है। इरफान के वकील ने आरोप लगाया कि विधायक को फंसाने के लिए पुलिस ने ही फर्जी आधारकार्ड तैयार किया है। कहा कि परिवार को मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है। सीपी और जेसीपी को निचले स्तर के अधिकारियों ने गुमराह किया है। थाना स्तर से गड़बड़ियां की गईं।
जाजमऊ के जिस प्लॉट पर आग लगाने की बात की जा रही है। उसमें आरोप लगाने वाली नजीर फातिमा, शम्सुल हसन, नसीम आरिफ, अकील अहमद, विमल कुमार और आशु ने इरफान के भाई रिजवान से 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। इसमें 12 लाख रुपये नकद और तीन लाख रुपये चेक से दिए भी जा चुके हैं। इसकी लिखित शिकायत 10 अक्टूबर को जाजमऊ थाने में की गई लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी गई। जबकि पुलिस ने नसीम, अकील और विमल की तरफ से पुलिस ने इरफान, रिजवान के खिलाफ दिसंबर में रंगदारी और जमीन पर कब्जे की एफआईआर लिख ली।
पुलिस ने ही बनवाया फर्जी आधार कार्ड
वकील गौरव दीक्षित ने बताया कि इरफान पर फर्जी आधार कार्ड लगाकर हवाई यात्रा करने का आरोप है। आधार कार्ड अशरफ अली का बताया गया। इस पर इरफान सोलंकी ने कानपुर जेल से सात दिसंबर को इरफान ने कोतवाली के एसएचओ को चिट्ठी लिखी थी। अशरफ अली ने इरफान को बताया था कि पुलिस ही फर्जी आधार कार्ड तैयार करने की बात कह रही है। इस शिकायती चिट्ठी पर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं दर्ज की। सवाल खड़े किए कि पुलिस ने आधार कार्ड बरामद किए बिना ही 26 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस को कैसे पता चला था कि इरफान ने फर्जी आधार कार्ड पर यात्रा की।
मानवीय मूल्यों का भी जेल प्रशासन कर रहा दरकिनार
इरफान सोलंकी को स्पाइन और पथरी की समस्या है। महाराजगंज से कानपुर कोर्ट पेशी के दौरान आते जाते पानी इसलिए नहीं पिया कि बार-बार लघुशंका के लिए जाना पड़ता। इससे उन्हें दिक्कत हुई। महाराजगंज के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने कई जांचें लिखीं लेकिन जेल प्रशासन ने कोई जांच नहीं कराई। इतनी शीतलहर की सर्दी में जेल में उन्हें रजाई, गद्दा तक नहीं दिया गया है। जेल प्रशासन न्यूनतम मानवीय मूल्यों को दरकिनार कर रहा है।