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Raksha Bandhan 2021: 474 साल बाद रक्षाबंधन पर बना गजकेसरी योग, इस मुहूर्त में राखी बांधने से पूरी होगी हर मन्नत

Sun, 22 Aug 2021 01:18 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 22 Aug 2021 01:18 AM IST
सार

ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव तिवारी ने बताया कि जब किसी की कुंडली में चंद्रमा और गुरु एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठे हो तो तब गजकेसरी योग बनता है। ऐसे जातक भाग्यशाली होते हैं।

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रक्षाबंधन 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में रक्षाबंधन का त्योहार 22 अगस्त यानी आज मनाया जा रहा है। इस बार रक्षाबंधन पर्व लोगों के लिए बड़ा खास रहेगा क्योंकि 474 साल बाद गजकेसरी योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का त्योहार भद्रा से मुक्त रहेगा।

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उनके मुताबिक रक्षाबंधन का त्योहार राजयोग में आ रहा है। बहनें पूरा दिन भाइयों के हाथ में राखी बांध सकती हैं। उन्होंने बताया कि इस बार गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बन रहा है। इस योग में घर में सुखों की प्राप्ति होती है।
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राखी बांधने के बाद बहन अपने भाई के लिए जो मन्नत मांगती हैं वह पूरी जरूर होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव तिवारी ने बताया कि जब किसी की कुंडली में चंद्रमा और गुरु एक दूसरे की तरफ दृष्टि कर बैठे हो तो तब गजकेसरी योग बनता है। ऐसे जातक भाग्यशाली होते हैं।

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पंडित गौरव तिवारी के मुताबिक सुबह 6:15 से लेकर 10:34 तक शोभन योग भी रहेगा जो इस रक्षाबंधन को और भी अच्छा बनाएगा। अचार्य पवन तिवारी ने बताया कि पद्म पुराण में कई कथाएं इस पर्व से जुड़ी हैं। एक कथा विष्णु भगवान के वामन अवतार और राजा बली की भी है। इस कथा में वर्णन है कि इस अवतार में भगवान विष्णु राजा बली की कर्तव्यपरायणता से प्रसन्न होकर स्वेच्छा से उनके द्वारपाल बनकर पाताल लोक चले जाते हैं।

तब मां लक्ष्मी राजा बली को श्रावण पूर्णिमा को भाई के रूप में रक्षा सूत्र बांधती हैं और अपने पति विष्णु को वापस लेकर आ जाती हैं। शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण की तर्जनी में चोट आ गई, तो द्रौपदी ने रक्त रोकने के लिए साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी थी।

यह भी श्रावण मास की पूर्णिमा थी। पूजा में इस दिन भाई को पूर्व मुख करके बैठाएं तथा खुद पश्चिम की ओर मुख कर, जल शुद्धि करके भाई को रोली और अक्षत का तिलक लगा कर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए रक्षासूत्र बांधें -
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:
तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल:।।


राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
राखी पर भद्राकाल का विचार अवश्य करना चाहिए, लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं रहेगी। भद्राकाल राखी के अगले दिन यानी 23 अगस्त को सुबह 5 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस बार राखी बांधने के लिए आपको 22 अगस्त की सुबह 5 बजकर 50 मिनट से शाम 6 बजकर 03 मिनट का समय मिलेगा।
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