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Kanpur News: अकबरपुर निकाय जल्द लांच करेगा जैविक खाद ब्रांड
Wed, 18 Jun 2025 01:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 18 Jun 2025 01:05 AM IST
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कानपुर देहात। अकबरपुर निकाय किसानों के लिए जैविक खाद बनाकर बेचने की तैयारी में है। जल्द इसका ब्रांड तय होगा। परिवहन मंत्री के हाथों जैविक खाद की लांचिंग होगी। नगर सखी गीला व सूखा कचरा अलग एकत्र करने के प्रति लोगों को जागरूक करेगी। इससे उन्हें रोजगार मिलेगा। निकाय की आमदनी बढ़ेगी।
नगर में एक नंदीशाला व एक कान्हा गोशाला है। हर दिन क्विटलों गोबर खेप निकलती है। इनमें 28 खाद बनाने के गड्ढे हैं। यहां केचुआ खाद बनाने की पहल की गई है। इधर नसरमपुर मंचौरा में एमआरएफ सेंटर संचालित है। यहां स्वचालित प्लांट में जैविक खाद बनाई जा रही है।
मंदिरों में चढ़ाए गए फूल, सब्जी मंडी में साफ-सफाई कर उठाई गई खराब सब्जियां, पेड़ की गिरी पत्तियां आदि से जैविक खाद बन रही है। प्रतिदिन करीब पांच क्विंटल सामग्री से 175 किलो जैविक खाद तैयार होती है। प्रति माह प्लांट में करीब 10 क्विंटल जैविक खाद बनाने का लक्ष्य है। वहीं केचुआ खाद मिलाकर करीब 150 क्विंटल खाद तैयार करने को लेकर काम हो रहा है। इस आधार पर प्रति माह करीब दो से ढाई लाख रुपये आमदनी होगी। 23 जून को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के हाथों बस अड्डे का लोकार्पण प्रस्तावित है। इसी दौरान नगर निकाय जैविक खाद ब्रांड भी लांच करेगा। जैविक खाद ब्रिकी प्रोत्साहन व गीला व सूखा कचरा अलग करने के प्रति जन जागरूक में नगर सखी की मदद ली जाएगी।
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वर्जन......
जैविक व केचुआ खाद बनाकर इसका प्रयोग पौधों में करके देखा गया है। काफी उत्साहित करने वाले परिणाम दिखे हैं। इसको लेकर इस कार्यक्रम पर काम किया गया है। प्रयुक्त फूल, सब्जी कचरा व पत्तियों आदि से जैविक खाद व गोशाला में गोबर से केचुआ खाद बन रही है। बाजार मूल्य के कम पर इसे उपलब्ध कराया जाएगा। - आशीष कुमार, ईओ अकबरपुर।
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कचरा से खाद बनाकर बेचने से निकाय की आमदनी बढ़ेगी। नगर सखियों को रोजगार मिलेगा। प्रतिदिन तीन घंटे के अनुसार नगर सखी काम कर सकेंगी। इसे उन्हें अतिरिक्त आय होगी। - जितेंद्र सिंह गुड्डन, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि
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तीन घंटे काम के मिलेंगे 133 रुपये
दो नगर सखी की टीम घर -घर जाकर गीला व सूखा कूड़ा अलग करने के प्रति लोगों को जागरूक करेगी। जैविक खाद के बारे में भी लोगों को बताएंगीं। सुबह 7 बजे से 10 बजे तक उनकी ड्यूटी रहेगी। इसके एवज में 133 रुपये निकाय प्रशासन देगा। इस आधार पर नगर सखी को प्रति माह करीब चार हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी।
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जानें क्या है जैविक व केचुआ खाद
केचुआं खाद (वर्मी कम्पोस्ट) पोषण तत्वों से भरपूर होती है। गोबर में केचुआ डालकर इसे तैयार किया जाता है। बदबू नहीं आती। मक्खी व मच्छर नहीं पनपते हैं। इसी प्रकार जैविक खाद वनस्पतियों, फेंकी गई सब्जी एवं भोजन के कचरे आदि को विघटित कर बनाई जाती है। एफआरएफ सेंटर में इसका प्लांट लगा है। इन खादों के प्रयोग से फसल उत्पादकता बढ़ती है।
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नगर में एक नंदीशाला व एक कान्हा गोशाला है। हर दिन क्विटलों गोबर खेप निकलती है। इनमें 28 खाद बनाने के गड्ढे हैं। यहां केचुआ खाद बनाने की पहल की गई है। इधर नसरमपुर मंचौरा में एमआरएफ सेंटर संचालित है। यहां स्वचालित प्लांट में जैविक खाद बनाई जा रही है।
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मंदिरों में चढ़ाए गए फूल, सब्जी मंडी में साफ-सफाई कर उठाई गई खराब सब्जियां, पेड़ की गिरी पत्तियां आदि से जैविक खाद बन रही है। प्रतिदिन करीब पांच क्विंटल सामग्री से 175 किलो जैविक खाद तैयार होती है। प्रति माह प्लांट में करीब 10 क्विंटल जैविक खाद बनाने का लक्ष्य है। वहीं केचुआ खाद मिलाकर करीब 150 क्विंटल खाद तैयार करने को लेकर काम हो रहा है। इस आधार पर प्रति माह करीब दो से ढाई लाख रुपये आमदनी होगी। 23 जून को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के हाथों बस अड्डे का लोकार्पण प्रस्तावित है। इसी दौरान नगर निकाय जैविक खाद ब्रांड भी लांच करेगा। जैविक खाद ब्रिकी प्रोत्साहन व गीला व सूखा कचरा अलग करने के प्रति जन जागरूक में नगर सखी की मदद ली जाएगी।
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जैविक व केचुआ खाद बनाकर इसका प्रयोग पौधों में करके देखा गया है। काफी उत्साहित करने वाले परिणाम दिखे हैं। इसको लेकर इस कार्यक्रम पर काम किया गया है। प्रयुक्त फूल, सब्जी कचरा व पत्तियों आदि से जैविक खाद व गोशाला में गोबर से केचुआ खाद बन रही है। बाजार मूल्य के कम पर इसे उपलब्ध कराया जाएगा। - आशीष कुमार, ईओ अकबरपुर।
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कचरा से खाद बनाकर बेचने से निकाय की आमदनी बढ़ेगी। नगर सखियों को रोजगार मिलेगा। प्रतिदिन तीन घंटे के अनुसार नगर सखी काम कर सकेंगी। इसे उन्हें अतिरिक्त आय होगी। - जितेंद्र सिंह गुड्डन, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि
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तीन घंटे काम के मिलेंगे 133 रुपये
दो नगर सखी की टीम घर -घर जाकर गीला व सूखा कूड़ा अलग करने के प्रति लोगों को जागरूक करेगी। जैविक खाद के बारे में भी लोगों को बताएंगीं। सुबह 7 बजे से 10 बजे तक उनकी ड्यूटी रहेगी। इसके एवज में 133 रुपये निकाय प्रशासन देगा। इस आधार पर नगर सखी को प्रति माह करीब चार हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी।
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जानें क्या है जैविक व केचुआ खाद
केचुआं खाद (वर्मी कम्पोस्ट) पोषण तत्वों से भरपूर होती है। गोबर में केचुआ डालकर इसे तैयार किया जाता है। बदबू नहीं आती। मक्खी व मच्छर नहीं पनपते हैं। इसी प्रकार जैविक खाद वनस्पतियों, फेंकी गई सब्जी एवं भोजन के कचरे आदि को विघटित कर बनाई जाती है। एफआरएफ सेंटर में इसका प्लांट लगा है। इन खादों के प्रयोग से फसल उत्पादकता बढ़ती है।