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इंजीनियरिंग में प्रवेश पर रोक, एआईसीटीई ने जारी किया नो एडमिशन का फरमान

Sat, 04 May 2019 11:30 AM IST
प्रशांत कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 04 May 2019 11:30 AM IST
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AICTE announces no admission order, Stop entry in engineering
यूआईईटी में इस बार एडमिशन पर रोक
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) में इस बार एडमिशन पर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने रोक लगा दी है। काउंसिल के मानकों पर खरा न उतरने पर यह फरमान जारी किया गया है। वहीं दूसरी ओर हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) को राहत देते हुए पूर्व में घटाई गईं सभी 25 प्रतिशत सीटें वापस कर दी गई हैं। 
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एआईसीटीई ने सत्र 2019-20 के लिए अप्रूवल देने से पहले देश भर के इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेजों की समीक्षा की थी। इसमें बड़ी संख्या में कॉलेजों में अनियमितता पाई गईं और सभी पर कार्रवाई भी की गई। इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की संख्या और योग्यता, अभिलेख, भवनों की स्थिति आदि मानक तय किए गए थे। कुछ कॉलेजों को बंदी का नोटिस दिया गया तो कुछ की सीटें घटा दी गईं।
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एआईसीटीई के इस बड़े आदेश के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया

इसमें शहर के यूआईईटी, एचबीटीयू, राजकीय पॉलिटेक्निक, यूपीटीटीआई सहित कई निजी कॉलेज भी थे। दो चरणों में कॉलेजों ने एआईसीटीई के इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। अंतिम चरण की अपील के बाद शुक्रवार को फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी गई। इसके मुताबिक यूआईईटी को ‘नो एडमिशन’ का फरमान सुनाया गया है।

मतलब नए सत्र में यूआईईटी में कोई भी एडमिशन नहीं हो पाएंगे। यूआईईटी में इंजीनियरिंग के अलावा बीसीए जैसे प्रोग्राम भी संचालित होते हैं। एआईसीटीई के इस बड़े आदेश के बाद विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया। कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि काउंसिल की तरफ से मांगे गए सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे। इसके पहले ही काउंसिल ने यह फैसला सुना दिया है। हम इसके खिलाफ काउंसिल की उच्च कमेटी में अपील करेंगे। अभी एडमिशन शुरू होने में दो माह हैं, तब तक काफी स्थिति बदली नजर आएगी।

 

राजकीय पॉलिटेक्निक में दस प्रतिशत सीटें घटी

काउंसिल ने राजकीय पॉलिटेक्निक में शिक्षकों की कमी को देखते हुए दस प्रतिशत सीटें घटा दी हैं। अब संस्थान में सभी 12 ब्रांच में 54-54 सीटें ही रह गई हैं। अभी तक प्रत्येक ब्रांच में 60-60 सीटों पर एडमिशन दिया जाता था। प्रिंसिपल ई. आरके सिंह ने बताया कि वह काउंसिल के इस आदेश के खिलाफ एक बार फिर से अपील दायर करेंगे। पूरी उम्मीद है कि काउंसिल हमारी मजबूरियां समझेगी।

यूपीटीटीआई की सीटें भी बच गईं
उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) को भी काउंसिल ने बड़ी राहत दी है। संस्थान की घटाई गईं सभी 10 प्रतिशत सीटों को वापस कर दिया गया है। नए सत्र में संस्थान की सभी सीटों में एडमिशन हो पाएंगे। संस्थान के निदेशक प्रो. मुकेश कुमार ने बताया कि यह संस्थान के लिए अच्छी बात है कि हम काउंसिल के मानक पर खरे उतरने में कामयाब हुए हैं।
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