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Kanpur: कोविड के बाद बिगड़ी बच्चों की गणित, बढ़ी खुदकुशी की मानसिकता…पढ़ाई का भी तनाव, एक्सपर्ट बोले ये

Sun, 08 Sep 2024 04:45 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 08 Sep 2024 04:45 PM IST
सार

Kanpur News: एसजीपीजीआई लखनऊ की साइको काउंसलर ने बताया कि कोविड के बाद पहले बच्चों की पढ़ने की आदत छूटी। वहीं,  अब बच्चे एग्जाम फोबिया, अवसाद और एंजाइटी की गिरफ्त में हैं।

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After Covid childrens maths deteriorated, suicidal mentality increased, stress of studies too
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

कोविड के बाद से स्कूली बच्चे गणित से अधिक घबराने लगे हैं, उनकी मानसिक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस समस्या का असर अभी तक दिख रहा है। स्कूली बच्चों में अवसाद, एंजाइटी और आत्महत्या की मनोवृत्ति बढ़ गई है। ये बातें संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ की वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ और साइको काउंसलर डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने बताईं।

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 वे 10 साल से किशोरों और युवाओं की काउंसलिंग कर रही हैं। डॉ. पियाली भट्टाचार्य शनिवार को हैलट के ब्लड बैंक सभागार में भारतीय बालरोग अकादमी के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में आईं थीं। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि कोविड के बाद 30 फीसदी मानसिक रोगी बढ़ गए हैं। सबसे अधिक दिक्कत उन बच्चों की मानसिक स्थिति में आई है, जिनके परिजनों की मौत कोविड संक्रमण से हुई है।

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10 से 15 आयु वर्ग का समूह
उन्होंने बताया कि एक समूह 10 से 15 आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं का है। कोविड काल में इनके पढ़ने की आदत छूट गई। अब इन्हें गणित में सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। इससे बच्चे परीक्षा फोबिया, अवसाद और एंजाइटी की गिरफ्त में हैं। विषय समझने की क्षमता घट गई है। इसके साथ ही इनमें आत्महत्या का ख्याल आने लगा है। वहीं दूसरा समूह 16 से 18 आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं का है। इनकी मानसिक स्थिति पहले समूह से थोड़ी अलग है।

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युवाओं का समूह
उन्होंने बताया कि दूसरे बड़े समूह के छात्र-छात्राओं में कॅरिअर की चिंता रहती है। इसकी वजह से ये एंजाइटी की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसके साथ ही याददाश्त में दिक्कत आई है। इन्हें भी गणित से अधिक परेशानी है। इस ग्रुप के बच्चे अधिक उग्र हो गए हैं, चोरी करने लगे हैं और नशे की लत लग गई है। जो अमीर घर के बच्चे हैं वे ड्रग्स, शराब का अधिक इस्तेमाल करते पाए गए। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे स्मैक और दूसरे सस्ते नशे के लती हो गए।

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कोरोना काल के बाद बच्चों में संक्रमण अधिक
वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कपूर और डॉ. सोनिया भट्ट ने बताया कि कोरोना काल में बच्चे दो साल घर के अंदर रहे। इससे उनके इम्युनिटी सिस्टम की गतिविधि धीमी हो गई। अब बाहर निकल रहे हैं तो संक्रमण अधिक हो रहा है। उन्होंने बताया कि संक्रमण से इम्युनिटी सिस्टम विकसित होता है और शरीर में एंटीबॉडीज बनती है। इससे बच्चों में एलर्जी की भी दिक्कत बढ़ी है।

ऐसे पहचानें बच्चे की मानसिक दिक्कत

  • अचानक बहिर्मुखी या अंतर्मुखी हो जाएं।
  • पसंद की चीजें अचानक बंद कर दें।
  • सामान्य आदतों में बदलाव आ जाए।
  •  पैसा चोरी करने लगें, नशा करने लगें।
  • चिड़चिड़ापन रहे, खुराक कम हो जाए।
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