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मौरावां गैंगरेप: अधिवक्ता बोले- जानमाल का है खतरा, अज्ञात लोग कर चुके हैं पीछा, SP से सुरक्षा की मांग

Wed, 26 Apr 2023 07:51 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 26 Apr 2023 07:51 PM IST
सार

Unnao Crime: मौरावां सामूहिक दुष्कर्म मामले में पीड़िता के बच्चों की हालत में सुधार है। वहीं, अधिवक्ता  ने जानमाल का खतरा बताया है। बता दें कि 15 महीने पहले तीन युवकों ने 13 साल की किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म किया था।

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Advocate said there is danger of life and property, unknown people have chased, demanding protection from SP
पीडि़ता और बच्चा, जला हुआ घर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के घर में दस दिन पहले लगी आग की घटना में झुलसे दोनों मासूमों की हालत में सुधार हुआ है। अब पीड़िता का केस लड़ रहे अधिवक्ता ने जानमाल खतरा बताया है। अधिवक्ता का कहना है कि दो बार अज्ञात लोग उनका पीछा कर रहे हैं।

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यहां तक कि लोग कचहरी में बस्ते तक पहुंच गए और केस से दूर रहने को कहा। अधिवक्ता ने एसपी से मिल सुरक्षा की मांग की है। मौरावां में हुए सामूहिक दुष्कर्म कांड की पीड़िता का केस लड़ रहे अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी ने एसपी मिल प्रार्थनापत्र दिया और जानमाल का खतरा बताया है।
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उन्होंने कहा कि वह जिला न्यायालय के साथ उच्च न्यायालय में भी वकालत करते हैं। बांगरमऊ में घर होने से रोजाना सड़क मार्ग से आना जाना है। 20 अप्रैल को जिला सत्र न्यायालय में पीड़िता के मुकदमें की पैरवी के दौरान कुछ लोग पीछा कर रहे थे। इसके बाद में पास आए और बोले इस मामले से दूर रहो।

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अज्ञात लोग बोले- इस मामले से दूर रहो
अपनी जान क्यों जोखिम में डाल रहे हो। उन्हें पहचानता नहीं। सामने आए, तो पहचान लूंगा। 24 अप्रैल को प्रार्थी पीड़िता के बच्चों को देखने लखनऊ ट्रामा सेंटर गया था। वहां भी कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने आकर मुझसे मुकदमें संबंधित बातचीत की। वहां इसके साक्षी तैनात पुलिस कर्मी और स्वास्थ्य कर्मी हैं।

बच्चों की हालत में सुधार, वेंटिलेटर से वार्ड में शिफ्ट
मौरावां थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी (13) साल की किशोरी के साथ 15 महीने पहले हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना में मां बनी किशोरी के बच्चे को जेल से छूटे आरोपी मारना चाहते हैं। 17 अप्रैल की शाम दुष्कर्म पीड़िता के घर में घुसकर आरोपियों ने किशोरी को पीटा था।

दुष्कर्म पीड़िता को भी आई थीं चोटें
साथ ही चार महीने के उसके बच्चे और तीन महीने की बहन को आग में फेंका था। इससे दोनों बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे। साथ ही दुष्कर्म पीड़िता के दाहिने हाथ में चोट आई थी। झुलसे दोनों बच्चों को लखनऊ स्थित ट्रामा सेंटर के आईसीयू वार्ड में इलाज चल रहा था। बच्चों की हालत में अब सुधार हो गया है।

डीएनए टेस्ट से बचने के लिए रची थी साजिश
सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के अधिवक्ता संजीव त्रिवेदी ने बताया कि पीड़िता के बच्चे को आग में फेंकने के पीछे आरोपियों का मकसद यह था कि उसकी मौत होने के बाद डीएनए टेस्ट से बच जाएंगे। बताया कि पीड़िता के मुताबिक, सामूहिक दुष्कर्म में पांच आरोपी शामिल थे, लेकिन पुलिस ने तीन को जेल भेजा था।

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