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एडीजी और आईजी कानपुर ग्रामीण के साथ देखेंगे जोन और रेंज, कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद बदल जाएगी पुलिसिंग
Fri, 26 Mar 2021 08:14 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 26 Mar 2021 08:14 AM IST
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कानपुर
- फोटो : amar ujala
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट लागू होते ही रेंज और जोन के अफसरों के प्रभार में थोड़ा बदलाव होगा। शहर में एडीजी और आईजी की तैनाती तो रहेगी, लेकिन कानपुर नगर उनके क्षेत्र में नहीं आएगा। वो कानपुर ग्रामीण और जोन-रेंज के जिलों के मुखिया होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर और संयुक्त पुलिस कमिश्नर पद पर नए अफसरों की तैनाती होगी। पुलिस कमिश्नर के लिए दो अफसरों का नाम चर्चा में है। जल्द ही इस पर मुहर लगेगी। वर्तमान में एडीजी जोन के पास कानपुर रेंज और झांसी रेंज का प्रभार हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर और संयुक्त पुलिस कमिश्नर पद पर नए अफसरों की तैनाती होगी। पुलिस कमिश्नर के लिए दो अफसरों का नाम चर्चा में है। जल्द ही इस पर मुहर लगेगी। वर्तमान में एडीजी जोन के पास कानपुर रेंज और झांसी रेंज का प्रभार हैं।
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इन दोनों रेंज में कुल नौ जिले हैं। वहीं आईजी रेंज के पास कानपुर रेंज का प्रभार है। इसमें छह जिले हैं। कमिश्नरी लागू होने के बाद इन दोनों अफसरों के पास से कानपुर नगर के 34 थानों का प्रभार हट जाएगा। इनके पास यहां के ग्रामीण के 11 थानों समेत रेंज और जोन के अन्य जिलों का प्रभार रहेगा।
डीआईजी से हटेगी शहर की कमान
शहर की कमान वर्तमान में डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के पास है। कमिश्नरेट लागू होते ही उनके पास से ये अधिकार हट जाएगा। कप्तान के सभी अधिकारी पुलिस कमिश्नर के पास होंगे। अब देखना होगा कि शासन अपर पुलिस आयुक्त का पद सृजित करता है या नहीं। नोएडा में तीन अपर आयुक्त हैं, जिसमें एक के पास कानून-व्यवस्था, दूसरे के पास क्राइम एंड हेडक्वार्टर और तीसरे के पास हेडक्वार्टर प्रथम पद का चार्ज है।
इसलिए कमिश्नरेट की थी जरूरत
भारतीय पुलिस एक्ट व सीआरपीसी के तहत दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में कानपुर जिले की आबादी लगभग 55 लाख है। नियमानुसार यहां पर कमिश्नरेट ही लागू होना था। काफी समय बाद व्यवस्था लागू की गई है।
डीआईजी से हटेगी शहर की कमान
शहर की कमान वर्तमान में डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के पास है। कमिश्नरेट लागू होते ही उनके पास से ये अधिकार हट जाएगा। कप्तान के सभी अधिकारी पुलिस कमिश्नर के पास होंगे। अब देखना होगा कि शासन अपर पुलिस आयुक्त का पद सृजित करता है या नहीं। नोएडा में तीन अपर आयुक्त हैं, जिसमें एक के पास कानून-व्यवस्था, दूसरे के पास क्राइम एंड हेडक्वार्टर और तीसरे के पास हेडक्वार्टर प्रथम पद का चार्ज है।
इसलिए कमिश्नरेट की थी जरूरत
भारतीय पुलिस एक्ट व सीआरपीसी के तहत दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में कानपुर जिले की आबादी लगभग 55 लाख है। नियमानुसार यहां पर कमिश्नरेट ही लागू होना था। काफी समय बाद व्यवस्था लागू की गई है।