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Kanpur News: स्त्री सत्संग जत्थे के बिना पूरा नहीं होता सिख समागम
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कानपुर। सिख समाज में स्त्री सत्संग जत्थों की संख्या में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है। पांच साल पहले तक इनकी संख्या शहर के गुरुद्वारों में करीब 25 थी जो अब 40 से ज्यादा हो गई है। हर जत्थे में औसत तीस महिलाएं हैं। वर्तमान में गुरुद्वारों के साथ ही अन्य जगहों पर सिख समागम हो रहा है। इनमें स्त्री सत्संग जत्थे भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। कोई भी समागम बिना स्त्री सत्संग जत्थे के पूरा नहीं होता है। यह जत्थे सुखमनी साहिब का पाठ, शबद कीर्तन कर संगत को निहाल करते हैं।
शहर में मीरीपीरी सोसाइटी, माई रज्जी स्त्री सत्संग, गुरुद्वारा पांडुनगर सहित 40 से ज्यादा स्त्री सत्संग जत्थे हैं। मीरीपीरी सोसाइटी की प्रधान अनमीत कौर ने बताया कि पिछले पांच सालों में स्त्री सत्संग जत्थों की संख्या बढ़ने के साथ ही इनसे जुड़ने के लिए महिलाओं में रुचि अधिक देखी गई है। महिलाएं इनसे जुड़कर न केवल धार्मिक गतिविधियों में भाग लेती हैं बल्कि समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने बताया कि स्त्री सत्संग जत्थे गुरुद्वारों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम जैसे कीर्तन, पाठ और अन्य अनुष्ठान में भाग लेते हैं। इसके अलावा महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए भी कार्यक्रम आयोजित करते हैं। समाज सेवा के कार्यों जैसे कि रक्तदान, अकाल राहत और अन्य गतिविधियों में भी यह जत्थे भागीदारी रखते हैं। सरदार मोहकम सिंह ने बताया कि स्त्री सत्संग जत्थे महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। यह जत्थे समाज में एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं। स्त्री सत्संग जत्थे सिख धर्म और संस्कृति की विरासत को संरक्षित करने और उन्हें बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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शहर में मीरीपीरी सोसाइटी, माई रज्जी स्त्री सत्संग, गुरुद्वारा पांडुनगर सहित 40 से ज्यादा स्त्री सत्संग जत्थे हैं। मीरीपीरी सोसाइटी की प्रधान अनमीत कौर ने बताया कि पिछले पांच सालों में स्त्री सत्संग जत्थों की संख्या बढ़ने के साथ ही इनसे जुड़ने के लिए महिलाओं में रुचि अधिक देखी गई है। महिलाएं इनसे जुड़कर न केवल धार्मिक गतिविधियों में भाग लेती हैं बल्कि समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
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उन्होंने बताया कि स्त्री सत्संग जत्थे गुरुद्वारों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम जैसे कीर्तन, पाठ और अन्य अनुष्ठान में भाग लेते हैं। इसके अलावा महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए भी कार्यक्रम आयोजित करते हैं। समाज सेवा के कार्यों जैसे कि रक्तदान, अकाल राहत और अन्य गतिविधियों में भी यह जत्थे भागीदारी रखते हैं। सरदार मोहकम सिंह ने बताया कि स्त्री सत्संग जत्थे महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। यह जत्थे समाज में एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं। स्त्री सत्संग जत्थे सिख धर्म और संस्कृति की विरासत को संरक्षित करने और उन्हें बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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