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एक नेता ऐसा भीः गरीब बेसहारा बच्चों के मसीहा बन गए 'कानपुर के नवाब'
सलोनी भल्ला, कानपुर
Updated Sat, 29 Sep 2018 04:41 PM IST
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नवाब सिंह यादव अपने संस्थान में बच्चों के साथ
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यूपी के कानपुर शहर में एक भाजपा नेता ऐसा भी है जो समाजसेवा को अपना धर्म समझता है। यह नेता बाकी नेताओं से बिल्कुल अलग है इसकी वजह बड़ी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनका पूरा दिन बेसहारों की मदद में गुजर जाता है। हम बात कर रहे हैं बर्रा-5 निवासी नवाब सिंह यादव की। नवाब कानपुर में शक्ति धाम समग्र विकास सेवा संस्थान नाम से एनजीओ चलाते हैं। इस संस्था के तहत पिछले 14 साल से निशुल्क चिकित्सा-शिक्षा और अनाथालय की सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
एक ओर जहां राजनेता बड़ी-बड़ी बातें करके समाज और देश को अपने लच्छेदार भाषणों से लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते तो दूसरी ओर कुछ नेता ऐसे भी हैं जो समाज को एक अलग दिशा देते हैं और समाजहित में ही काम करते हैं। भाजपा नेता नवाब सिंह यादव जो बर्रा इलाके से पूर्व पार्षद रह चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के साथ वह पिछले कई सालों से राजनीति में उच्च पदों पर सक्रिय हैं। नवाब ने बच्चों के लिए शिक्षा-चिकित्सा सेवा और अनाथालय के भावों को संजोकर समग्र सेवा संस्था का गठन साल 2004 में शहर के तमाम समाजसेवियों के साथ मिलकर किया था। बेसहारा बच्चों का इलाज कराने के साथ नवाब उन्हें निशुल्क शिक्षा भी उपलब्ध कराते हैं।
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एक ओर जहां राजनेता बड़ी-बड़ी बातें करके समाज और देश को अपने लच्छेदार भाषणों से लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते तो दूसरी ओर कुछ नेता ऐसे भी हैं जो समाज को एक अलग दिशा देते हैं और समाजहित में ही काम करते हैं। भाजपा नेता नवाब सिंह यादव जो बर्रा इलाके से पूर्व पार्षद रह चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के साथ वह पिछले कई सालों से राजनीति में उच्च पदों पर सक्रिय हैं। नवाब ने बच्चों के लिए शिक्षा-चिकित्सा सेवा और अनाथालय के भावों को संजोकर समग्र सेवा संस्था का गठन साल 2004 में शहर के तमाम समाजसेवियों के साथ मिलकर किया था। बेसहारा बच्चों का इलाज कराने के साथ नवाब उन्हें निशुल्क शिक्षा भी उपलब्ध कराते हैं।
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अब तक 1000 से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आश्रय दे चुकी है संस्था
बच्चों की पूरी जिम्मेदारी लेती है यह संस्था
नवाब ने जब अपनी एनजीओ का गठन किया तो सबसे पहले एक लावारिस बच्चे को गोद लिया, जिसका नाम राम रखा। बच्चे का इलाज कराने के बाद उन्होेंने बच्चे की पूरी जिम्मेदारी उठा ली। इसके बाद 2004 में ही उन्होंने कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती एक विकलांग बालक को अपने संरक्षण में लेकर उसका इलाज कराया। पांच वर्षीय बच्चे को लखन नाम दिया गया। इन्हीं दोनों बच्चों के नाम को आगे बढ़ाते हुए अगले साल 2005 में उन्होेंने श्री राम-लखन विद्या मंदिर निशुल्क विद्यालय की शुरुआत की। इस संस्था के संचालन में कई बड़े उद्योगपति और कारोबारी जुड़े हैं। जिनमें महेश वरयानी, नरेन्द्र जुनेजा, सरदार निर्मलजीत सिंह, विष्णू सहाय, विनोद धवन, देवेन्द्र शंकर शुक्ला, डी.सी खरे, एसएस तिवारी, हर्ष गुलाटी प्रमुख हैं। इन सभी के योगदान से यह संस्थान अब तक 1000 से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आश्रय दे चुका है।
बिना सरकारी सहायता से पुल का निर्माण कराया गया
बच्चों की पूरी जिम्मेदारी लेती है यह संस्था
शिक्षा के साथ स्वास्थ सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए साल 2011 में मधुर लोचनी धर्मार्थ चिकित्सालय भी शुरु किया गया। इस अस्पताल में आसपास के गांव से तमाम लोग इलाज कराने आते हैं। डॉ. मनीष मोहन, डॉ. प्रशांत कपूर, डॉ. जी.टी थवानी , डॉ. ए.के श्रीवास्तव, डॉ. विपेन्द्र सिंह, डॉ. अश्वनी उत्तम, डॉ. मोहित खत्री, डॉ. आरती लाल चंदानी, डॉ. महेश खट्टर, डॉ. अनूप अरोड़ा, डॉ. सुनील प्रजापती और डॉ. आर.जे कुशवाहा निशुल्क इलाज देते हैं। इसके अलावा नवाब की संस्था की ओर से समाज सेवा के साथ विकास से जुड़े काम भी हुए हैं। जैसे कि पांडु नदी के ऊपर बिना सरकारी सहायता से एक पुल के निर्माण कराया गया। जिसमें लगभग 4 लाख रुपए का खर्च आया, जिसको संसथान के लोगों ने मिलकर उठाया और 6 मई 2006 को जय राम दास वरयानी सेतु (पुल) जनता को समर्पित किया गया जिससे अास पास के 20 गांवो को लाभ हुअा है। इसी साल संस्था की ओर से 25 बच्चों की निशुल्क शिक्षा का जिम्मा उठाया है। सभी बच्चे मूलरूप से असम, नागालैंड और त्रिपुरा के रहने वाले हैें।