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Kanpur News: परहुल देवी मंदिर के पास रिंद नदी पर बनेगा पुल
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लमहरा में ऐतिहासिक परहुल देवी मंदिर के पास से बहती रिंद नदी ।
कानपुर देहात। रूरा के पास लमहरा में ऐतिहासिक परहुल देवी मंदिर के करीब रिंद नदी पर 14.07 करोड़ से पुल निर्माण की शासन से मंजूरी मिल गई है। इसके लिए 4.92 लाख रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है। कार्यदायी संस्था सेतु निगम अब ठेकेदार चयन की प्रक्रिया शुरू करेगा।
रूरा के पास शिवली मार्ग से करीब तीन किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग से लमहरा गांव जुड़ा है। यहां रिंद नदी किनारे 12वीं शताब्दी में ऊंचे टीले पर बना परहुल देवी मंदिर है। लमहरा गांव से नदी के दूसरी ओर जाने के लिए पुल नहीं है। इसकी मांग काफी समय से हो रही है। गर्मी में नदी सूखने पर लोग इस रास्ते से दूसरी ओर खेतों में आवाजाही करते हैं जबकि नदी में पानी होने पर नाव से ही आवाजाही का विकल्प है। दूसरी ओर खेतों में जाने के लिए लोगों को करीब पांच किलोमीटर से अधिक का चक्कर लगाकर जाना पड़ता है।
लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2025-26 की कार्य योजना में पुल का प्रस्ताव भेजा था। इसकी वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी शासन ने 18 मार्च को दे दी है। नदी पर पुल, पहुंच मार्ग व अतिरिक्त पहुंच मार्ग बनाने के लिए कुल 14.07 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। सेतु निगम के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि लमहरा में परहुल देवी मंदिर के पास रिंद नदी पर पुल बनाने की मंजूरी मिली है। जल्द ही निर्माण संबंधी प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
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क्यों खास है परहुल देवी स्थान
लमहरा गांव के बाहर की तरफ उत्तर दिशा में रिंद नदी है। इसी के किनारे ऊंचे टीले पर परहुल देवी का ऐतिहासिक मंदिर है। यहां नवरात्र पर मेला लगता है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आते हैं। यह मंदिर आल्हा-ऊदल के समय पर भी था। परमाल रासो (आल्हा) में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि 12वीं शताब्दी में परहुल के राजा सिंघा ने देवी मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर में सोने का बहुत बड़ा दीपक जलता था। कन्नौज के राजमहल तक जलते दीपक की चमक पहुंचती थी। इससे रानी पद्मावती की नींद में खलल पड़ता था। इसपर ऊदल ने दीपक को रिंद नदी के कुंड में फेंक दिया था। परमाल रासो में इसका जिक्र है।
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रूरा के पास शिवली मार्ग से करीब तीन किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग से लमहरा गांव जुड़ा है। यहां रिंद नदी किनारे 12वीं शताब्दी में ऊंचे टीले पर बना परहुल देवी मंदिर है। लमहरा गांव से नदी के दूसरी ओर जाने के लिए पुल नहीं है। इसकी मांग काफी समय से हो रही है। गर्मी में नदी सूखने पर लोग इस रास्ते से दूसरी ओर खेतों में आवाजाही करते हैं जबकि नदी में पानी होने पर नाव से ही आवाजाही का विकल्प है। दूसरी ओर खेतों में जाने के लिए लोगों को करीब पांच किलोमीटर से अधिक का चक्कर लगाकर जाना पड़ता है।
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लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2025-26 की कार्य योजना में पुल का प्रस्ताव भेजा था। इसकी वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी शासन ने 18 मार्च को दे दी है। नदी पर पुल, पहुंच मार्ग व अतिरिक्त पहुंच मार्ग बनाने के लिए कुल 14.07 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। सेतु निगम के सहायक अभियंता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि लमहरा में परहुल देवी मंदिर के पास रिंद नदी पर पुल बनाने की मंजूरी मिली है। जल्द ही निर्माण संबंधी प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
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क्यों खास है परहुल देवी स्थान
लमहरा गांव के बाहर की तरफ उत्तर दिशा में रिंद नदी है। इसी के किनारे ऊंचे टीले पर परहुल देवी का ऐतिहासिक मंदिर है। यहां नवरात्र पर मेला लगता है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आते हैं। यह मंदिर आल्हा-ऊदल के समय पर भी था। परमाल रासो (आल्हा) में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि 12वीं शताब्दी में परहुल के राजा सिंघा ने देवी मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर में सोने का बहुत बड़ा दीपक जलता था। कन्नौज के राजमहल तक जलते दीपक की चमक पहुंचती थी। इससे रानी पद्मावती की नींद में खलल पड़ता था। इसपर ऊदल ने दीपक को रिंद नदी के कुंड में फेंक दिया था। परमाल रासो में इसका जिक्र है।