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इंजेक्शन लगते ही 40 बच्चों की हालत बिगड़ी
Kanpur
Updated Wed, 25 Sep 2013 05:38 AM IST
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कानपुर। बाल रोग चिकित्सालय में सोमवार को एंटीबॉयटिक इंजेक्शन सिफ्ट्रायक्सॉन लगते ही 40 बच्चों की हालत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टियां होने लगीं और कुछ बच्चे बेहोश होने लगे। इससे हड़कंप मच गया। बच्चों के परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। आनन-फानन सभी सीनियर डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी अपने अमले के साथ पहुंच गए और बच्चों का इलाज शुरू कराया। इंजेक्शन के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी गई। शुरुआती जांच में इंजेक्शन के इस बैच में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मरीजों के परिजन परेशान हो गए। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ डॉक्टर पहुंचे। तुरंत उस इंजेक्शन की पूरी लाट के उपयोग पर रोक लगा दी गई। उसकी जगह मेडिकल स्टोर से इसी कंपाउंड के दूसरे एंटीबायोटिक इंजेक्शन मंगाकर लगवाना शुरू किया गया। बाल रोग चिकित्सालय में वायरल फीवर, मलेरिया, पीलिया, टायफायड आदि बीमारियों की वजह से भर्ती 40 बच्चों को शाम को सिफ्ट्रायक्सॉन इंजेक्शन लगाया गया। कुछ देर में एक-एक कर इन बच्चों को उल्टियां होने लगीं। कुछ पर बेहोशी छाने लगी। वार्डों में मौजूद डॉक्टर जब तक कुछ समझ पाते, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। वे चीखते-रोते इधर-उधर भागने लगे। जूनियर डॉक्टरों ने तुरंत इस इंजेक्शन का इस्तेमाल रोक दिया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशवंत राव समेत अन्य सीनियर डॉक्टरों को जानकारी दी गई। कुछ ही देर में विभागाध्यक्ष समेत अन्य सीनियर डॉक्टर अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल इस इंजेक्शन की पूरी लॉट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। शुरुआती जांच में इस इंजेक्शन में फंगस या कोई अन्य गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। अस्पताल में यह इंजेक्शन ‘जी - लेबोरेट्री’ कंपनी से खरीदा गया। इस इंजेक्शन की नई लाट आई थी, इससे एक-एक इंजेक्शन निकालकर मरीजों को लगाया जा रहा था।
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