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डीएम समेत आधा दर्जन अफसरों को एनजीटी का नोटिस
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा/नरैनी।
यूपी-एमपी की सरहद में केन नदी पर बने प्राकृतिक रपटे (रास्ते) को दोनों सूबों के प्रशासन द्वारा अक्सर तोड़ने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बांदा और छतरपुर के डीएम समेत आधा दर्जन अफसरों को नोटिस जारी कर 10 अप्रैल तक जवाब मांगा है।
इस रपटे को बालू माफिया द्वारा अपने बालू भरे ट्रकों को निकालने के लिए इस्तेमाल करने पर यूपी-एमपी प्रशासन ध्वस्त करा देता है। एनजीटी अब इस पर अगली सुनवाई 17 अप्रैल को करेगी। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के गांव हाजीपुर (छतरपुर) की ग्राम पंचायत ने एनजीटी ने रिट दायर करके कहा कि सीमा पर लगभग एक दर्जन गांवों के लोग केन नदी में बने प्राकृतिक रपटे से नदी पार करके अपने जरूरी कामों से उस पार जाते हैं। ग्राम प्रधान कुलदीप मिश्रा ने अपनी रिट में कहा कि बांदा और छतरपुर (यूपी और एमपी) का प्रशासन अक्सर इन रपटों का तोड़ देता है। ग्रामीणों का आवागमन बंद हो जाता है।
यह रपटा मध्य प्रदेश के बारबंद और यूपी के नसेनी (बांदा) गांवों के बीच केन नदी पर बना है। याचिका में अनुरोध किया है कि रपटा तोड़ा न जाए। ग्राम पंचायत की इस याचिका पर एनजीटी के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह राठौर और सदस्य/विशेषज्ञ डा. सत्यावन सिंह गर्बियाल की दो सदस्यीय बेंच ने 23 मार्च को जारी आदेश में बांदा और छतरपुर के जिलाधिकारियों, नरैनी (बांदा) व लवकुश नगर (छतरपुर) के एसडीएम, प्रदेश के पर्यावरण सचिव आदि को नोटिस जारी कर 10 अप्रैल तक इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। 17 अप्रैल को इस पर सुनवाई होगी। ज्ञात हो कि नदी पर कुछ रपटे प्राकृतिक हैं, जबकि कुछ बालू ठेकेदारों द्वारा अपनी खदानों के बालू ट्रक निकालने के लिए अवैधानिक रूप से बना लिए जाते हैं। ऐसे ही सरहद पर बिल्हरका (बांदा) गांव के पास केन नदी में बने रपटे की खबर अमर उजाला ने फोटो सहित सोमवार 26 मार्च को प्रकाशित की है।
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-छतरपुर के डीएम और कई अफसरों से भी मांगा जवाब
-केन नदी का प्राकृतिक रपटा न तोड़ने की याचिका
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बांदा/नरैनी।
यूपी-एमपी की सरहद में केन नदी पर बने प्राकृतिक रपटे (रास्ते) को दोनों सूबों के प्रशासन द्वारा अक्सर तोड़ने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बांदा और छतरपुर के डीएम समेत आधा दर्जन अफसरों को नोटिस जारी कर 10 अप्रैल तक जवाब मांगा है।
इस रपटे को बालू माफिया द्वारा अपने बालू भरे ट्रकों को निकालने के लिए इस्तेमाल करने पर यूपी-एमपी प्रशासन ध्वस्त करा देता है। एनजीटी अब इस पर अगली सुनवाई 17 अप्रैल को करेगी। सीमावर्ती मध्य प्रदेश के गांव हाजीपुर (छतरपुर) की ग्राम पंचायत ने एनजीटी ने रिट दायर करके कहा कि सीमा पर लगभग एक दर्जन गांवों के लोग केन नदी में बने प्राकृतिक रपटे से नदी पार करके अपने जरूरी कामों से उस पार जाते हैं। ग्राम प्रधान कुलदीप मिश्रा ने अपनी रिट में कहा कि बांदा और छतरपुर (यूपी और एमपी) का प्रशासन अक्सर इन रपटों का तोड़ देता है। ग्रामीणों का आवागमन बंद हो जाता है।
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यह रपटा मध्य प्रदेश के बारबंद और यूपी के नसेनी (बांदा) गांवों के बीच केन नदी पर बना है। याचिका में अनुरोध किया है कि रपटा तोड़ा न जाए। ग्राम पंचायत की इस याचिका पर एनजीटी के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह राठौर और सदस्य/विशेषज्ञ डा. सत्यावन सिंह गर्बियाल की दो सदस्यीय बेंच ने 23 मार्च को जारी आदेश में बांदा और छतरपुर के जिलाधिकारियों, नरैनी (बांदा) व लवकुश नगर (छतरपुर) के एसडीएम, प्रदेश के पर्यावरण सचिव आदि को नोटिस जारी कर 10 अप्रैल तक इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। 17 अप्रैल को इस पर सुनवाई होगी। ज्ञात हो कि नदी पर कुछ रपटे प्राकृतिक हैं, जबकि कुछ बालू ठेकेदारों द्वारा अपनी खदानों के बालू ट्रक निकालने के लिए अवैधानिक रूप से बना लिए जाते हैं। ऐसे ही सरहद पर बिल्हरका (बांदा) गांव के पास केन नदी में बने रपटे की खबर अमर उजाला ने फोटो सहित सोमवार 26 मार्च को प्रकाशित की है।
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-छतरपुर के डीएम और कई अफसरों से भी मांगा जवाब
-केन नदी का प्राकृतिक रपटा न तोड़ने की याचिका