सम्मान की लड़ाई: 70 वर्षीय विष्णु कुमार लड़ रहे हैं केस, केस्को दर्ज करा चुका है कई मुकदमे, जानें पूरा मामला
70 वर्षीय विष्णु कुमार दस साल से केस्को से सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने जो चोरी की नहीं है, केस्को ने उसमें भी बार-बार मुकदमा दर्ज कराया है। विष्णु के अनुसार तीन साल से ज्यादा हो गए कोर्ट लगातार नोटिस भेज रहा है, लेकिन कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा।
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कानपुर में 70 वर्षीय आरटीआई एक्टिविस्ट विष्णु कुमार अग्रवाल दस साल से केस्को की भ्रष्ट कार्यशैली के खिलाफ कानूनी जंग लड़ रहे हैं। लाटूश रोड उपखंड के अवर अभियंता एसबी गुप्ता ने 17 जनवरी 2012 को विष्णु अग्रवाल के बेटे अभिषेक अग्रवाल के खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था।
आरोप लगाया कि बिजली का बिल बकाया होने पर इनके घर की बिजली काट दी गई थी लेकिन बिना बकाया जमा किए अवैध रूप से बिजली कनेक्शन दोबारा जोड़ लिया गया। इसे लेकर अभिषेक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने याचिका के निस्तारण तक कार्रवाई पर रोक लगा दी।
इसके बाद विष्णु ने केस्को से बकाया बिल और मीटर कनेक्शन के बाबत दो सूचनाएं मांगीं, लेकिन सही जवाब नहीं मिला। विष्णु के अनुसार उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील कर दी तो राज्य सूचनाधिकारी ने सूचनाएं न देने पर केस्को अफसरों पर 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगा दिया।
केस्को अफसर हाईकोर्ट गए लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली और जुर्माना अदा करना पड़ा। बताया कि इससे खिसियाए केस्को अफसरों ने उन पर बिजली चोरी का आरोप लगाकर एक और एफआईआर दर्ज करा दी। आरोप लगाया कि चेकिंग के दौरान उन्हें केस्को की एलटी लाइन से डायरेक्ट कटिया जोड़कर बिजली चोरी करते पाया गया। पुलिस ने मामले की जांच की, तो आरोप झूठा पाए जाने पर फाइनल रिपोर्ट कोर्ट भेज दी।
विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट ने मुकदमे के वादी केस्को प्रवर्तन दल के प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार द्विवेदी को 10 मई 2019 को नोटिस भेजकर कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए थे। विष्णु के अनुसार तीन साल से ज्यादा हो गए कोर्ट लगातार नोटिस भेज रहा है, लेकिन राजेश कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा। इसे मुकदमा लंबित है।
बिजली कनेक्शन जुड़ा नहीं, मीटर लगा नहीं लेकिन लाखों का बिल बकाया हो गया। बकाया कैसे हुआ, इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं। घर पर सोलर पैनल और जनरेटर से बिजली जल रही है। लड़ाई सच्चाई और सम्मान की है। भ्रष्ट व्यवस्था के सामने घुटने नहीं टेकूंगा। -विष्णु कुमार अग्रवाल, पीड़ित