कन्या भोज के बहाने 7 साल की बच्ची को घर से ले गया, फिर कलेजा निकालने वाले तांत्रिक को सौंपा!
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पनकी के गंगागज इलाके की इस घटना ने पूरे इलाके में दहला दिया। जानकारी के मुताबिक बच्ची खुशी की मां गोल्डी श्रीवास्तव के ससुर पनकी पावल हाउस में काम करते थे। यहां उनकी जान पहचान राममूर्ति कुशवाहा से थी। दोनों पहले अपने-अपने परिवार के साथ सरकारी आवास में रहते थे। गोल्डी के ससुर की रिटायरमेंट के बाद उन्हें सरकारी आवास छोड़कर गंगागज आना पड़ा।
बाद में जानकारी मिली राममूर्ति की मौत के बाद उनके बेटे विनय को अपने पिता की नौकरी मिल गई है। एक दिन अचानक विनय गोल्डी श्रीवास्तव के घर पहुंचता है और उनकी बेटी खुशी(7) को कन्या भोज के लिए भेजने की बात कहता है। गोल्डी जानती थी कि विनय उनके ससुर के दोस्त का बेटा है इसलिए वो खुशी को साथ भेजने के तैयार हो जाती है लेकिन गोल्डी अपने बेटे पवन (11) को भी साथ भेज देती है।
इसके बाद विनय दोनों बच्चों को अपने घर लेकर आता है। वह पवन को बाहर रुकने की बात कहकर खुशी को अंदर ले जाता है। जैसे ही विनय खुशी को घर के अंदर दाखिल करता है, पवन बाहर से भीतर का नजारा देख लेता है। पवन को दो बाबा भभूत लगाए बैठे नजर आते हैं। इस पर वह घबरा जाता है। थोड़ा समय बीत जाने के बाद जब वह चुपके से घर की एक खिड़की खोलकर देखता है तो उसके होश उड़ जाते है। अंदर बैठा तांत्रिक बच्ची को भभूत लगाकर तंत्रमंत्र में विलीन दिखाई दिया।
पवन यह देख अपने घर वापस दौड़कर आया और अपनी मां गोल्डी को ये सारी बात बताई। गोल्डी फटाफट मोहल्ले की औरतों को इक्ट्ठा कर मौके पर पहुंचती है। जैसे ही वे घर में दाखिल होती है उसे खुशी एक हवन कुंड में जल रही आग के सामने भभूत लगाए बैठी नजर आई। यह देख गोल्डी का कलेजा हिल गया। उसने मासूम खुशी को वहां से उठाकर अपने कलेजे से लगा लिया। इसके बाद पुलिस को इस पूरे प्रकरण की सूचना देकर आरोपियों को गिरफ्तार कराया गया।