फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   झांसी की घास मिटाएगी गोवंशों की भूख

झांसी की घास मिटाएगी गोवंशों की भूख

Sat, 16 Feb 2019 10:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 16 Feb 2019 10:50 PM IST
विज्ञापन
झांसी की घास मिटाएगी गोवंशों की भूख
फर्रुखाबाद। झांसी की घास जिले के अन्ना गोवंश की भूख मिटाएगी। इसके लिए जिले में तैयारी की जा रही है। पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस घास को थोड़ी सी जगह में लगाया जाएगा। एक हफ्ते में इसकी पौध जनपद में आ जाएगी।
विज्ञापन


अन्ना गोवंश के दाना पानी के साथ ही हरे चारे की व्यवस्था करना भी एक बड़ा काम है। इसके लिए जिला प्रशासन झांसी से नेपियर घास की पौध मंगवाकर लगवा रहा है। यह घास शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर महज पांच हेक्टेयर के लिए आएगी। इसका सफल इस्तेमाल होने के बाद इस घास को ग्राम समाज की अन्य जमीनों पर भी लगाया जाएगा। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सीवीओ को एक हफ्ते मेें नेपियर घास मंगवाकर इसकी कार्यशाला करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह घास जानवरों के लिए गुणकारी होने के साथ ही किफायती भी होती है। इसकी एक बार बुआई करने बाद यह अपने आप ही दोबारा उग जाती है।
विज्ञापन


मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजकिशोर सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने जल्द से जल्द घास लगवाने के निर्देश दिए हैं। अगले हफ्ते तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है नेपियर घास
नेपियर घास के पौधों की रोपाई करने के बाद यह 20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है। यह देखने में बाजरे की तरह होती है। इसे पांच साल तक जानवरों को खिलाया जा सकता है। इसे काट कर व खेत में जानवरों को छोड़ कर भी खिलाया जा सकता है।

पहले तीन स्थानों पर लगाई जाएगी नेपियर घास
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि झांसी से पांच हेक्टेयर जमीन के लिए ही नेपियर घास की पौध मंगाई जा रही है। शुरुआत में इसे कटरी धर्मपुर, मोहम्मदाबाद के नवादा दोयम में बन रहे वृहद गोसंरक्षण केंद्र व एक अन्य स्थान पर लगाया जाएगा। इसका सफल इस्तेमाल होने के बाद अन्य सरकारी जमीनों पर नेपियर घास को उगा कर लगाया जाएगा।


किफायती व फायदेमंद है नेपियर
नेपियर घास किफायती होने के साथ ही फायदेमंद भी है। जानवरों की मुख्य जरूरत भूसा, दाना आदि की होती है। आज के समय में भूसे का बाजार भाव एक हजार रुपये क्विंटल के आसपास है। जबकि, नेपियर घास काफी समय के लिए तैयार हो जाती है। इसमें पानी की ज्यादा आवश्यकता भी नहीं है। इसके साथ ही इससे दूध की मात्रा व गुणवत्ता में भी इजाफा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed