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झांसी की घास मिटाएगी गोवंशों की भूख
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फर्रुखाबाद। झांसी की घास जिले के अन्ना गोवंश की भूख मिटाएगी। इसके लिए जिले में तैयारी की जा रही है। पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस घास को थोड़ी सी जगह में लगाया जाएगा। एक हफ्ते में इसकी पौध जनपद में आ जाएगी।
अन्ना गोवंश के दाना पानी के साथ ही हरे चारे की व्यवस्था करना भी एक बड़ा काम है। इसके लिए जिला प्रशासन झांसी से नेपियर घास की पौध मंगवाकर लगवा रहा है। यह घास शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर महज पांच हेक्टेयर के लिए आएगी। इसका सफल इस्तेमाल होने के बाद इस घास को ग्राम समाज की अन्य जमीनों पर भी लगाया जाएगा। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सीवीओ को एक हफ्ते मेें नेपियर घास मंगवाकर इसकी कार्यशाला करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह घास जानवरों के लिए गुणकारी होने के साथ ही किफायती भी होती है। इसकी एक बार बुआई करने बाद यह अपने आप ही दोबारा उग जाती है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजकिशोर सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने जल्द से जल्द घास लगवाने के निर्देश दिए हैं। अगले हफ्ते तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा।
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20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है नेपियर घास
नेपियर घास के पौधों की रोपाई करने के बाद यह 20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है। यह देखने में बाजरे की तरह होती है। इसे पांच साल तक जानवरों को खिलाया जा सकता है। इसे काट कर व खेत में जानवरों को छोड़ कर भी खिलाया जा सकता है।
पहले तीन स्थानों पर लगाई जाएगी नेपियर घास
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि झांसी से पांच हेक्टेयर जमीन के लिए ही नेपियर घास की पौध मंगाई जा रही है। शुरुआत में इसे कटरी धर्मपुर, मोहम्मदाबाद के नवादा दोयम में बन रहे वृहद गोसंरक्षण केंद्र व एक अन्य स्थान पर लगाया जाएगा। इसका सफल इस्तेमाल होने के बाद अन्य सरकारी जमीनों पर नेपियर घास को उगा कर लगाया जाएगा।
किफायती व फायदेमंद है नेपियर
नेपियर घास किफायती होने के साथ ही फायदेमंद भी है। जानवरों की मुख्य जरूरत भूसा, दाना आदि की होती है। आज के समय में भूसे का बाजार भाव एक हजार रुपये क्विंटल के आसपास है। जबकि, नेपियर घास काफी समय के लिए तैयार हो जाती है। इसमें पानी की ज्यादा आवश्यकता भी नहीं है। इसके साथ ही इससे दूध की मात्रा व गुणवत्ता में भी इजाफा होता है।
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अन्ना गोवंश के दाना पानी के साथ ही हरे चारे की व्यवस्था करना भी एक बड़ा काम है। इसके लिए जिला प्रशासन झांसी से नेपियर घास की पौध मंगवाकर लगवा रहा है। यह घास शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर महज पांच हेक्टेयर के लिए आएगी। इसका सफल इस्तेमाल होने के बाद इस घास को ग्राम समाज की अन्य जमीनों पर भी लगाया जाएगा। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने सीवीओ को एक हफ्ते मेें नेपियर घास मंगवाकर इसकी कार्यशाला करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि यह घास जानवरों के लिए गुणकारी होने के साथ ही किफायती भी होती है। इसकी एक बार बुआई करने बाद यह अपने आप ही दोबारा उग जाती है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी राजकिशोर सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने जल्द से जल्द घास लगवाने के निर्देश दिए हैं। अगले हफ्ते तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा।
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20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है नेपियर घास
नेपियर घास के पौधों की रोपाई करने के बाद यह 20 से 25 दिन में तैयार हो जाती है। यह देखने में बाजरे की तरह होती है। इसे पांच साल तक जानवरों को खिलाया जा सकता है। इसे काट कर व खेत में जानवरों को छोड़ कर भी खिलाया जा सकता है।
पहले तीन स्थानों पर लगाई जाएगी नेपियर घास
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि झांसी से पांच हेक्टेयर जमीन के लिए ही नेपियर घास की पौध मंगाई जा रही है। शुरुआत में इसे कटरी धर्मपुर, मोहम्मदाबाद के नवादा दोयम में बन रहे वृहद गोसंरक्षण केंद्र व एक अन्य स्थान पर लगाया जाएगा। इसका सफल इस्तेमाल होने के बाद अन्य सरकारी जमीनों पर नेपियर घास को उगा कर लगाया जाएगा।
किफायती व फायदेमंद है नेपियर
नेपियर घास किफायती होने के साथ ही फायदेमंद भी है। जानवरों की मुख्य जरूरत भूसा, दाना आदि की होती है। आज के समय में भूसे का बाजार भाव एक हजार रुपये क्विंटल के आसपास है। जबकि, नेपियर घास काफी समय के लिए तैयार हो जाती है। इसमें पानी की ज्यादा आवश्यकता भी नहीं है। इसके साथ ही इससे दूध की मात्रा व गुणवत्ता में भी इजाफा होता है।