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Kanpur News: गांव के 40 फीसदी नवजात प्रसव के घंटे भर में पी लेते मां का दूध

Fri, 01 Aug 2025 01:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Aug 2025 01:39 AM IST
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40% of the newborns in the village drink their mother's milk within an hour of delivery
कानपुर। गांवों के 40 फीसदी नवजात प्रसव के घंटे भर कर अंदर मां का दूध पी लेते हैं। वहीं, शहरी इलाकों के 20 से 25 फीसदी नवजात ही इस अंतराल में मां का दूध पी पाते हैं। हैलट के बालरोग विभाग में आए एक हजार बच्चों की हिस्ट्री के अध्ययन से यह तथ्य पता चला है। बालरोग विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के घंटे भर के अंदर पिया गया मां का दूध बच्चे की सेहत के लिए सुरक्षा कवच बनता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बलवती होती है जो रोगों से बचाती है।
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बालरोग विभाग की ओपीडी में आने वाले बालरोगियों के सेहत की हिस्ट्री ली गई। इसमें यह भी पूछा गया कि बच्चे ने प्रसव के कितने देर बाद दूध पिया। मां का दूध पिया था या फिर बोतल से दूध पिलाया गया। इसमें ज्यादातर नगरीय इलाकों के बच्चों के बोतल से दूध पिलाया गया। वहीं, गांवों से आने वाले 40 फीसदी बच्चों को मां ने पैदाइश के घंटे भर के अंदर अपना दूध पिलाया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि नेशनल हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी नवजात पैदा होने के घंटे भर के अंदर मां का दूध पीते हैं। इस मामले में शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति बेहतर है।
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उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव वाले 50 फीसदी बच्चे ही पैदाइश के घंटे भर के अंदर मां का दूध पीते हैं। डॉ. गौतम का कहना है कि बहुत से मामलों में माताएं बच्चे को स्तनपान कराने में अनिच्छा जताती हैं। इस संबंध में गर्भधारण के बाद महिला को बच्चे को स्तनपान कराने के संबंध में जागरूक किया जाता है। बोतल से दूध पीने वाले नवजातों को डायरिया जल्दी होता है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। बीमारी के बाद रिकवरी धीरे होती है।
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