{"_id":"5b2bf0a44f1c1b624d8b76fe","slug":"201529606308-kanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चर्च मामले की जांच बेहद धीमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चर्च मामले की जांच बेहद धीमी
Updated Fri, 22 Jun 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। बहुचर्चित चर्च प्रकरण में रिपोर्ट दर्ज होने के पखवारे भर बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। आलम यह है कि कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन इनके खिलाफ आरोप पत्र बनाने में समय लग रहा है।
प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद उप निबंधक धर्मेंद्र चौधरी, शहर कोतवाल आरके सिंह, कानूनगो राजेंद्र सिंह पटेल, लेखपाल राजेंद्र प्रसाद सिंह और ओम प्रकाश विश्वकर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के तकरीबन पंद्रह दिन बीतने को हैं और अभी तक न तो मामले में विवेचक की विवेचना
ही आगे बढ़ पाई है और न ही प्रशासनिक अमला किसी नतीजे पर पहुंच सका है। स्थिति तो यहां तक है कि जिन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था, उनके विरुद्ध अब तक आरोप पत्र नहीं तैयार हो सके हैं। सूत्रों की मानें तो आरोप पत्र बनाने के लिए अधिकारियों को ठोस कारण ही नहीं मिल पा रहे हैं। निलंबित अधिकारियों पर सरकारी
विज्ञापन
जमीनों का प्राइवेट लोगों को बैनामा और दाखिल खारिज एवं कब्जा कराने के आरोप हैं। जबकि जांच में मामला चर्च की जमीन का निकला। ऐसे में अब निलंबित हो चुके लोगों के आरोप पत्र नहीं बन पा रहे हैं। वहीं इस मामले में निलंबित उप निबंधक धर्मेंद्र चौधरी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रकरण में अपर जिलाधिकारी जेपी गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पूरे मसले की गहनता से जांच की जा रही है। स्थितियां पूरी तरह से स्पष्ट होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। रही बात आरोप पत्रों की तो उस पर भी काम चल रहा है।
चर्च प्रकरण की जांच बेहद धीमी
निलंबित अफसरों के खिलाफ अब तक आरोप पत्र नहीं तैयार नहीं
उप निबंधक धर्मेंद्र चौधरी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
विज्ञापन
फतेहपुर। बहुचर्चित चर्च प्रकरण में रिपोर्ट दर्ज होने के पखवारे भर बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी है। आलम यह है कि कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन इनके खिलाफ आरोप पत्र बनाने में समय लग रहा है।
प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद उप निबंधक धर्मेंद्र चौधरी, शहर कोतवाल आरके सिंह, कानूनगो राजेंद्र सिंह पटेल, लेखपाल राजेंद्र प्रसाद सिंह और ओम प्रकाश विश्वकर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के तकरीबन पंद्रह दिन बीतने को हैं और अभी तक न तो मामले में विवेचक की विवेचना
विज्ञापन
ही आगे बढ़ पाई है और न ही प्रशासनिक अमला किसी नतीजे पर पहुंच सका है। स्थिति तो यहां तक है कि जिन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था, उनके विरुद्ध अब तक आरोप पत्र नहीं तैयार हो सके हैं। सूत्रों की मानें तो आरोप पत्र बनाने के लिए अधिकारियों को ठोस कारण ही नहीं मिल पा रहे हैं। निलंबित अधिकारियों पर सरकारी
विज्ञापन
जमीनों का प्राइवेट लोगों को बैनामा और दाखिल खारिज एवं कब्जा कराने के आरोप हैं। जबकि जांच में मामला चर्च की जमीन का निकला। ऐसे में अब निलंबित हो चुके लोगों के आरोप पत्र नहीं बन पा रहे हैं। वहीं इस मामले में निलंबित उप निबंधक धर्मेंद्र चौधरी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रकरण में अपर जिलाधिकारी जेपी गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पूरे मसले की गहनता से जांच की जा रही है। स्थितियां पूरी तरह से स्पष्ट होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। रही बात आरोप पत्रों की तो उस पर भी काम चल रहा है।
चर्च प्रकरण की जांच बेहद धीमी
निलंबित अफसरों के खिलाफ अब तक आरोप पत्र नहीं तैयार नहीं
उप निबंधक धर्मेंद्र चौधरी ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा