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खेल-खेल में बड़ी बहन ने छोटी बहन के सिर पर रखा पतीला, दो घंटे तक जिंदगी-मौत के बीच फंसी रही सांस
Tue, 09 Jul 2019 08:26 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 09 Jul 2019 08:26 PM IST
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पतीले को ब्लेड से काटकर मासूम का सिर आजाद हुआ
- फोटो : ANI
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हरदोई में खेल-खेल में मासूम की जान आफत में पड़ गई। सिर में पतीला फंसने से मासूम की जान सांसत में आ गई। वह दो घंटे तक जिंदगी और मौत की बीच जंग लड़ती रही। मशक्कत के बाद एक युवक ने लोहे के ब्लेड से पतीला काटकर मासूम की जान बचाई।
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पचदेवरा थाना क्षेत्र के ग्राम अनंगपुर निवासी रामबरन मजदूरी करता है। उसके परिवार में पत्नी रूबी के अलावा गुडिय़ा (5) व पिकीं (3) एक अन्य बेटी है। रविवार की सुबह पत्नी घरेलू कामों में व्यस्त हो गई। रामबरन भी घर से किसी काम से निकल गया।
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पतीला सिर से निकलने के बाद मां के साथ पिंकी
- फोटो : ANI
इसी दौरान दोनों बेटियां बरामदे में पतीला लेकर खेल रहीं थी। खेल-खेल में गुडिय़ा ने पतीला पिंकी के सिर में डाल दी। सिर में पतीली डालकर उसी पर बैठकर खेलने लगी। जब पिंकी को दिक्तत हुई तो वह रोने लगी। पिकीं के रोने की आवाज पर परिजन मौके पर आ गए।
परिजनों ने सिर में पतीला फंसा देखाा। परिजन पतीला निकालने का प्रयास करने लगे। काफी जद्दोजहद के बाद भी सफलता नहीं मिली। जिससे परेशान होकर परिजनों ने चीखना-चिल्लाना शुरु कर दिया। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर आ गए। सिर में पतीला फंसे लगभग दो घंटे बीत गए।
जिससे मासूम की जान खतरे में पड़ गई। वहीं गांव निवासी दाताराम ने समझदारी का परिचय देकर लोहे की ब्लेड से पतीला काटा। जिसके बाद पतीला सिर से निकाल कर मासूम की जान बचाई। जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली। गांव में दाताराम की समझदारी की दिन भर चर्चाएं होती रहीं।
परिजनों ने सिर में पतीला फंसा देखाा। परिजन पतीला निकालने का प्रयास करने लगे। काफी जद्दोजहद के बाद भी सफलता नहीं मिली। जिससे परेशान होकर परिजनों ने चीखना-चिल्लाना शुरु कर दिया। आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर आ गए। सिर में पतीला फंसे लगभग दो घंटे बीत गए।
जिससे मासूम की जान खतरे में पड़ गई। वहीं गांव निवासी दाताराम ने समझदारी का परिचय देकर लोहे की ब्लेड से पतीला काटा। जिसके बाद पतीला सिर से निकाल कर मासूम की जान बचाई। जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली। गांव में दाताराम की समझदारी की दिन भर चर्चाएं होती रहीं।