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सुरक्षा बल के लिए 18 कॉलेज अधिग्रहीत
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कानपुर देहात। राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ, आईटीबी, आरपीएफ के जवान लगाए गए हैं। ये जवान बुधवार को जिले में आ गए हैं। इन्हें ठहराने के लिए डीएम ने 18 कॉलेज अधिग्रहीत किए हैं। कालेजों में पानी, बिजली व शौचालय की व्यवस्था दुरुस्त कराई गई।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 27 जून को गृह जनपद के दौरे पर आ रहे हैं। जिला प्रशासन इसकी तैयारियों में लगा है। राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े पैमाने पर बाहर से फोर्स आ रहा है। ये फोर्स 27 जून की शाम तक रहेगा। इसके बाद अपने तैनाती स्थल के लिए रवाना हो जाएगा। फोर्स को व्यवस्थित ढंग से ठहराने के लिए डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कॉलेजों का अधिग्रहण किया है।
इसमें अकबरपुर स्थित सरला द्विवेदी डिग्री कॉलेज, जसवंत सिंह इंटर कॉलेज माती, प्रभात इंजीनियरिंग कॉलेज रनियां, कुंदनलाल महाविद्यालय रनियां, रामस्वरुप डिग्री कॉलेज अकबरपुर, ओपी शर्मा डिग्री कॉलेज रूरा, श्रीकृष्ण जनका देवी इंटर कॉलेज रूरा, पीपीएन महाविद्यालय जगतपुर, इंफैक्ट इंटर कॉलेज रूरा में सुरक्षा बलों को रोका गया है।
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इसके साथ यशोदा कुंवर महाविद्यालय भोगनीपुर, विशंभरनाथ महाविद्यालय शास्त्रीनगर पुखरायां, जनता डिग्री कॉलेज गौरीकरन, संस्कृत कॉलेज आफ हायर एजेकूशन एंड फार्मेसी हलधरपुर, श्रीकृष्ण जनका देवी डिग्री कॉलेज डिलवल, अहिल्याबाई होल्कर इंटर कॉलेज हवासपुर, रामादेवी डिग्री कॉलेज झींझक, जय बालाजी इंटर कॉलेज जैतापुर, चंद्रभान महाविद्यालय झींझक में फोर्स को ठहराने की व्यवस्था की गई है।
डीएम के निर्देश के बाद डीआईओएस अरविंद कुमार द्विवेदी ने कॉलेज संचालकों को पत्र जारी कर शौचालय व पानी, बिजली की व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। डीआईओएस ने ने बताया कि सभी कॉलेजों में व्यवस्था दुरुस्त कर ली गई है।
राष्ट्रपति के दखल से लोगों को मिला रास्ता
कानपुर देहात। 90 के दशक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का झींझक स्थित बड़े भाई के आवास में अक्सर आना हुआ करता था। उस समय वह राज्यसभा सांसद हुआ करते थे। इस दौरान मोहल्ले के लोगों ने उनसे घर के सामने से निकली सड़क को खुलवाने की मांग की। इसमें एक मकान अड़चन बना था।
भतीजी हेमलता कोविंद ने बताया कि 1994-95 में राज्यसभा सांसद रहते हुए रामनाथ कोविंद ने मकान मालिक से लोगों की समस्या को लेकर चर्चा की तो वह मकान बेचने को तैयार हो गया। इसके बाद मकान उनके बड़े भाई बालक राम ने अधिक दाम देकर खरीद लिया।
बाद में कोविंद परिवार ने 10 फिट जमीन रास्ते के लिए दान कर दी। इसकी चर्चा आज भी मोहल्ले के लोग करते हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रपति मामले को अपने स्तर से न लेते तो शायद यह न हो पाता और लोगों के लिए आज भी यह दिक्कत रहती।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 27 जून को गृह जनपद के दौरे पर आ रहे हैं। जिला प्रशासन इसकी तैयारियों में लगा है। राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े पैमाने पर बाहर से फोर्स आ रहा है। ये फोर्स 27 जून की शाम तक रहेगा। इसके बाद अपने तैनाती स्थल के लिए रवाना हो जाएगा। फोर्स को व्यवस्थित ढंग से ठहराने के लिए डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कॉलेजों का अधिग्रहण किया है।
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इसमें अकबरपुर स्थित सरला द्विवेदी डिग्री कॉलेज, जसवंत सिंह इंटर कॉलेज माती, प्रभात इंजीनियरिंग कॉलेज रनियां, कुंदनलाल महाविद्यालय रनियां, रामस्वरुप डिग्री कॉलेज अकबरपुर, ओपी शर्मा डिग्री कॉलेज रूरा, श्रीकृष्ण जनका देवी इंटर कॉलेज रूरा, पीपीएन महाविद्यालय जगतपुर, इंफैक्ट इंटर कॉलेज रूरा में सुरक्षा बलों को रोका गया है।
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इसके साथ यशोदा कुंवर महाविद्यालय भोगनीपुर, विशंभरनाथ महाविद्यालय शास्त्रीनगर पुखरायां, जनता डिग्री कॉलेज गौरीकरन, संस्कृत कॉलेज आफ हायर एजेकूशन एंड फार्मेसी हलधरपुर, श्रीकृष्ण जनका देवी डिग्री कॉलेज डिलवल, अहिल्याबाई होल्कर इंटर कॉलेज हवासपुर, रामादेवी डिग्री कॉलेज झींझक, जय बालाजी इंटर कॉलेज जैतापुर, चंद्रभान महाविद्यालय झींझक में फोर्स को ठहराने की व्यवस्था की गई है।
डीएम के निर्देश के बाद डीआईओएस अरविंद कुमार द्विवेदी ने कॉलेज संचालकों को पत्र जारी कर शौचालय व पानी, बिजली की व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। डीआईओएस ने ने बताया कि सभी कॉलेजों में व्यवस्था दुरुस्त कर ली गई है।
राष्ट्रपति के दखल से लोगों को मिला रास्ता
कानपुर देहात। 90 के दशक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का झींझक स्थित बड़े भाई के आवास में अक्सर आना हुआ करता था। उस समय वह राज्यसभा सांसद हुआ करते थे। इस दौरान मोहल्ले के लोगों ने उनसे घर के सामने से निकली सड़क को खुलवाने की मांग की। इसमें एक मकान अड़चन बना था।
भतीजी हेमलता कोविंद ने बताया कि 1994-95 में राज्यसभा सांसद रहते हुए रामनाथ कोविंद ने मकान मालिक से लोगों की समस्या को लेकर चर्चा की तो वह मकान बेचने को तैयार हो गया। इसके बाद मकान उनके बड़े भाई बालक राम ने अधिक दाम देकर खरीद लिया।
बाद में कोविंद परिवार ने 10 फिट जमीन रास्ते के लिए दान कर दी। इसकी चर्चा आज भी मोहल्ले के लोग करते हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रपति मामले को अपने स्तर से न लेते तो शायद यह न हो पाता और लोगों के लिए आज भी यह दिक्कत रहती।