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अब किराए के भवन में नहीं मिलेगी स्कूल की मान्यता
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कानपुर देहात। अब प्राथमिक (कक्षा पांच तक) और जूनियर (कक्षा आठ तक) स्कूलों के लिए मान्यता लेना आसान नहीं होगा। प्रदेश सरकार ने मान्यता के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब किराये के भवन में स्कूल का संचालन नहीं कराया जा सकेगा। अब स्कूल के नाम जमीन व मानक के अनुरूप भवन होने पर ही मान्यता मिलेगी। इसके साथ ही मान्यता शुल्क व जमानत राशि (एनएससी) में बढ़ोतरी की गई है।
प्राथमिक व जूनियर स्कूलों के संचालन के लिए एक दशक से चली आ रही मान्यता नियमावली में बदलाव किया गया है। रजिस्टर्ड किरायेनामा के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। अब स्कूल के नाम जमीन होना अनिवार्य है। भवन का नेशनल बिल्डिंग कोड प्रमाण पत्र व नगरीय क्षेत्र में भवन के निर्माण का नगरपालिका से नक्शा स्वीकृत होना चाहिए। संचालक को अग्निशमन, बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पुस्तकालय व बैठने के लिए मानक के अनुरूप कक्ष बनवाने के साथ उसमें फर्नीचर की व्यवस्था करनी पड़ेगी। प्राथमिक स्तर के मान्यता शुल्क को दो हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपये किया गया है। वहीं पांच हजार रुपये की एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) को राशि को एक लाख रुपये किया गया है। वहीं जूनियर स्तर के मान्यता शुल्क को तीन हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं जमानत राशि (एनएससी) डेढ़ लाख रुपये होगी। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए मान्यता के नियमों में बदलवा किया गया है, जिससे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न किया जा सके।
मान्यता के लिए लगी दो दर्जन से अधिक फाइलें नई नियमावली में फंस गईं। जिन्हें संबंधित स्कूल संचालकों को वापस कर नए नियमों को पूरा करने के बाद आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं। अब पत्रावली नए नियमों के अनुसार ही स्वीकृत होंगी। हालांकि नए नियमों को पूरा कर पत्रावली लगाना आसान काम नहीं रहा। अभी तक नियमों में शिथिलता के चलते लोग आसानी से मान्यता के लिए आवेदन कर देते थे।
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मान्यता के दिए जाने के बाद तीन साल शिक्षण शुल्क की बढ़ोत्तरी में रोक लगा दी गई है। तीन साल के बाद निर्धारित फीस के अनुसार दस फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं एक मान्यता पर दो स्कूल नहीं संचालित हो सकेंगे। ऐसे संचालकों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए संगीता सिंह ने बताया कि मान्यता नियमों में बदलाव कर दिया गया है। इसका शासनादेश आ गया है, नई शर्तों के साथ मान्यता के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। मान्यता मिलने के बाद ही स्कूल का संचालन करने दिया जाएगा।
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प्राथमिक व जूनियर स्कूलों के संचालन के लिए एक दशक से चली आ रही मान्यता नियमावली में बदलाव किया गया है। रजिस्टर्ड किरायेनामा के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। अब स्कूल के नाम जमीन होना अनिवार्य है। भवन का नेशनल बिल्डिंग कोड प्रमाण पत्र व नगरीय क्षेत्र में भवन के निर्माण का नगरपालिका से नक्शा स्वीकृत होना चाहिए। संचालक को अग्निशमन, बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पुस्तकालय व बैठने के लिए मानक के अनुरूप कक्ष बनवाने के साथ उसमें फर्नीचर की व्यवस्था करनी पड़ेगी। प्राथमिक स्तर के मान्यता शुल्क को दो हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपये किया गया है। वहीं पांच हजार रुपये की एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) को राशि को एक लाख रुपये किया गया है। वहीं जूनियर स्तर के मान्यता शुल्क को तीन हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं जमानत राशि (एनएससी) डेढ़ लाख रुपये होगी। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए मान्यता के नियमों में बदलवा किया गया है, जिससे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न किया जा सके।
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मान्यता के लिए लगी दो दर्जन से अधिक फाइलें नई नियमावली में फंस गईं। जिन्हें संबंधित स्कूल संचालकों को वापस कर नए नियमों को पूरा करने के बाद आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं। अब पत्रावली नए नियमों के अनुसार ही स्वीकृत होंगी। हालांकि नए नियमों को पूरा कर पत्रावली लगाना आसान काम नहीं रहा। अभी तक नियमों में शिथिलता के चलते लोग आसानी से मान्यता के लिए आवेदन कर देते थे।
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मान्यता के दिए जाने के बाद तीन साल शिक्षण शुल्क की बढ़ोत्तरी में रोक लगा दी गई है। तीन साल के बाद निर्धारित फीस के अनुसार दस फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं एक मान्यता पर दो स्कूल नहीं संचालित हो सकेंगे। ऐसे संचालकों पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए संगीता सिंह ने बताया कि मान्यता नियमों में बदलाव कर दिया गया है। इसका शासनादेश आ गया है, नई शर्तों के साथ मान्यता के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। मान्यता मिलने के बाद ही स्कूल का संचालन करने दिया जाएगा।