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आंखों में नमी और दिल में बदले की आग
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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात/डेरापुर। सीआरपीएफ के जवान शहीद श्यामबाबू के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही आसपास गांव के किशो, युवा और बुजुग पैदल, साइकिल व अन्य निजी वाहनों से रैगांव पहुंचने लगे थे। 10:10 बजे शव गांव की सीमा पर पहुंचते ही भीड़ ने भारत माता की जय, श्याम बाबू अमर रहे के जयकारे लगने लगे। मौजूद भीड़ शामिल हर व्यक्ति की आंखे नम थीं और उनके उनके दिलों में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। युवाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर आक्रोश भी जताया।
अधिकारी बार बार युवाओं को शांत कराते रहे। अंतेष्टि स्थल के आसपास रस्सी से बैरीकेडिंग लगाई थी। उत्साही युवा शहीद को श्रद्धासुमन अपिर्त करने के लिए रस्सी लांघने को बेताब रहे। अपने गांव के जांबाज के अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोग भी बेताब थे। सुबह गांव के सभी घरों से बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं शहीद के घर के बाहर और अंत्येष्टि स्थल पर पहुंच गए थे। मडनापुर, रतनियापुर, बिसोहा, इकघरा, मरहाना, इकरामपुर, अकारू, खल्ला, फत्तेपुर, कमालपुर, परौंख, कपासी, मुर्रा समेत आसपास के गांवों हजरों लोग भी शहीद को नमन करने पहुंचे। भीड़ का अनुमान प्रशासन ने पार्किंग, पेयजल, एंबुलेंस आदि की व्यवस्था क रखी थी। गांव की सीमा से ही पुलिस के जवान मुस्तैद रहे।
देश पर अपनी जान न्योछावर करने वाले वीर सपूत श्यामबाबू को श्रद्धांजलि देते समय मां कैलाशी देवी फफक पड़ीं। बेटे से जुदाई के गम में वह बेसुध होकर लड़खड़ाने लगीं। साथ मौजूद समाजसेवी कंचन मिश्रा ने उन्हें संभाला। पत्नी रूबी भी पत्नी को पुष्प अर्पित करते समय बेहोश हो र्गइं। उन्हें केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और परिजनों ने संभाला। दोनों को अधिकारियों ने घर भिजवाया। बहन रेखा भी भाई के गम में बेहोश हो गई थीं।
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आंखों में आंसू और दिल में धधकी आग
गांव में शव पहुंचते युवाओं ने लगाए पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे
कानपुर देहात/डेरापुर। सीआरपीएफ के जवान शहीद श्यामबाबू के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही आसपास गांव के किशो, युवा और बुजुग पैदल, साइकिल व अन्य निजी वाहनों से रैगांव पहुंचने लगे थे। 10:10 बजे शव गांव की सीमा पर पहुंचते ही भीड़ ने भारत माता की जय, श्याम बाबू अमर रहे के जयकारे लगने लगे। मौजूद भीड़ शामिल हर व्यक्ति की आंखे नम थीं और उनके उनके दिलों में पाकिस्तान के प्रति गुस्सा था। युवाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाकर आक्रोश भी जताया।
अधिकारी बार बार युवाओं को शांत कराते रहे। अंतेष्टि स्थल के आसपास रस्सी से बैरीकेडिंग लगाई थी। उत्साही युवा शहीद को श्रद्धासुमन अपिर्त करने के लिए रस्सी लांघने को बेताब रहे। अपने गांव के जांबाज के अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोग भी बेताब थे। सुबह गांव के सभी घरों से बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं शहीद के घर के बाहर और अंत्येष्टि स्थल पर पहुंच गए थे। मडनापुर, रतनियापुर, बिसोहा, इकघरा, मरहाना, इकरामपुर, अकारू, खल्ला, फत्तेपुर, कमालपुर, परौंख, कपासी, मुर्रा समेत आसपास के गांवों हजरों लोग भी शहीद को नमन करने पहुंचे। भीड़ का अनुमान प्रशासन ने पार्किंग, पेयजल, एंबुलेंस आदि की व्यवस्था क रखी थी। गांव की सीमा से ही पुलिस के जवान मुस्तैद रहे।
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देश पर अपनी जान न्योछावर करने वाले वीर सपूत श्यामबाबू को श्रद्धांजलि देते समय मां कैलाशी देवी फफक पड़ीं। बेटे से जुदाई के गम में वह बेसुध होकर लड़खड़ाने लगीं। साथ मौजूद समाजसेवी कंचन मिश्रा ने उन्हें संभाला। पत्नी रूबी भी पत्नी को पुष्प अर्पित करते समय बेहोश हो र्गइं। उन्हें केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और परिजनों ने संभाला। दोनों को अधिकारियों ने घर भिजवाया। बहन रेखा भी भाई के गम में बेहोश हो गई थीं।
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आंखों में आंसू और दिल में धधकी आग
गांव में शव पहुंचते युवाओं ने लगाए पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे