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फसल के अवशेषों को जलाएं नहीं, जैविक खाद बनाएं
Updated Fri, 28 Sep 2018 01:07 AM IST
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घाटमपुर (कानपुर )। कस्बे के उप संभागीय कृषि प्रसार कार्यालय में गुरुवार को विकास खंड स्तरीय कृषक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में फसलों के अवशेष जलाने की जगह उसको जैविक खाद में परिवर्तित करने के तरीके समझाए। कृषियंत्रों में मिलने वाली छूट के बारे में भी जानकारी दी।
कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि किसान खरीफ और रबी में फसलों की कटाई करने के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जला देते हैं। जिससे खेत में कार्बन और पीएच की मात्रा प्रभावित होने के साथ ही मिट्टी की उपजाऊ परत में पलने वाले जैविक कीट नष्ट होते हैं। जबकि, पराली और फसल के अवशेष जलाने पर उड़ने वाले धुंए और जहरीली गैसों से पर्यावरण भी प्रभावित होता है।
उन्होंने बताया कि फसल काटने के बाद किसान खेतों की जुताई रोटावेटर व हैरो से करवाएं, जिससे फसलों के अवशेष टुकड़े-टुकड़े होकर मिट्टी के साथ मिल जाते हैं। मिट्टी और नमी के संपर्क में आने के बाद जैविक खाद के रूप में बदल जाते हैं। कृषि विषयवस्तु विशेषज्ञ अरुण कुमार सिंह ने किसानों को कृषि विभाग की ओर से अनुदान में दिए जा रहे कृषियंत्रों रोटावेटर, हीपर, सीड ड्रिल और थ्रेसर आदि के बारे में बताया।
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इधर, राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि रबी की फसलों के बीज आने शुरू हो गए हैं। बताया कि चने का बीज आ चुका है जबकि, एक-दो दिनों में तोरिया और लाही का बीज आने की उम्मीद है। उन्होंने बीज भंडार में मिलने वाले बीजों में अनुदान (छूट) पाने के लिए किसान खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटोकापी लेकर आएं। कृषि गोष्ठी में प्राविधिक सहायक नीरज कुमार, विवेक सिंह, वेदप्रकाश, राकेश सिंह और अशोक कुमार ने भी किसानों को कृषि से संबंधित विषयों की जानकारी दी।
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कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि किसान खरीफ और रबी में फसलों की कटाई करने के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जला देते हैं। जिससे खेत में कार्बन और पीएच की मात्रा प्रभावित होने के साथ ही मिट्टी की उपजाऊ परत में पलने वाले जैविक कीट नष्ट होते हैं। जबकि, पराली और फसल के अवशेष जलाने पर उड़ने वाले धुंए और जहरीली गैसों से पर्यावरण भी प्रभावित होता है।
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उन्होंने बताया कि फसल काटने के बाद किसान खेतों की जुताई रोटावेटर व हैरो से करवाएं, जिससे फसलों के अवशेष टुकड़े-टुकड़े होकर मिट्टी के साथ मिल जाते हैं। मिट्टी और नमी के संपर्क में आने के बाद जैविक खाद के रूप में बदल जाते हैं। कृषि विषयवस्तु विशेषज्ञ अरुण कुमार सिंह ने किसानों को कृषि विभाग की ओर से अनुदान में दिए जा रहे कृषियंत्रों रोटावेटर, हीपर, सीड ड्रिल और थ्रेसर आदि के बारे में बताया।
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इधर, राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी संजीव कुमार ने बताया कि रबी की फसलों के बीज आने शुरू हो गए हैं। बताया कि चने का बीज आ चुका है जबकि, एक-दो दिनों में तोरिया और लाही का बीज आने की उम्मीद है। उन्होंने बीज भंडार में मिलने वाले बीजों में अनुदान (छूट) पाने के लिए किसान खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटोकापी लेकर आएं। कृषि गोष्ठी में प्राविधिक सहायक नीरज कुमार, विवेक सिंह, वेदप्रकाश, राकेश सिंह और अशोक कुमार ने भी किसानों को कृषि से संबंधित विषयों की जानकारी दी।